कुछ अपनी कह कुछ मेरी सुन
कुछ अपनी कह, कुछ मेरी सुनजरा मेरी सुन, मन की बातचार दिनों का जग मेला हैमन की बात जरा मेरी सुन▪️पहले भी हम झगड़ते थेमान मनौव्वल करते थेमन में नहीं पाला अनमनहंस कर गले मिलते थे▪️ज़िद पर हैं हम अड़े हुएपरिपक्व अभी हम नहीं हुएतर्क की है कमी नहींवितर्क में हम फँसे हुए▪️क्यों रखे मन … Read more