Umanath Tripathi
रे मन प्रभु भक्ति में तू रम जा
रे मन ! प्रभु भक्ति में रम जा शरण प्रभु का तू गह ले ..2 आँख मूँद ले ध्यान लगा ले सोच जरा परीक्षित जैसे समय सीमा तेरी निश्चित है काल खड़ा है द्वार पर तेरे शेष जीवन जो तेरे हाथ में मानव जीवन सार्थक कर ले हाथ कहीं मलता न रह जा शरण प्रभु … Read more
भजन नवधा भक्ति
कथा श्रवण परीक्षित जैसी वाचक हो शुक देव सा भक्त बनो प्रह्लाद के जैसेप्रभु दास बनो हनुमान सा।पाद सेवन माँ लक्ष्मी जैसी प्रभु वंदन अक्रूर सा संख्य भाव में अर्जुन बन जाओ उपदेशक हो श्रीकृष्ण सा । अर्पण कर दो तन मन प्रभु को आत्म निवेदन राजा बलि सा नवधा भक्ति में रम जाओ प्रेम … Read more
झुलसती धरती
प्रकृति का दोहन करने वालों,जरा सजगतुम हो जाओ।नहीं पाओगे शरण कहीं,न कोई तुम्हें बचाएगा।प्रकृति ही तेरी रक्षक है,प्रकृति ही तेरी भक्षक भी।खिलवाड़ न करो उससे अब,नहीं तो दाह में भस्म हो जाओगे।हरियाली से तुम हो अनजान,क्यों नयन तुम्हारे तरसते हैं?तू साफ़ कर रहा वृक्ष‑समूह,कहाँ फिर तुझे छाँव मिलते हैं?वृक्ष काटना नहीं छोड़ रहे,समझ रहे हो … Read more
ऐ मेरी रसना
ऐ मेरी रसना राम नाम तू क्यों नहीं रटतीनिन्दा करती दिन रात औरों की तेरा जी नहीं भरती विषयों में अनुरक्ति तेरी समय व्यर्थ तू करती भाग रही मृगतृष्णा के पीछे अमृत रस ग्रहण नहीं करती श्रवन कलंकित हो गये तेरे ईर्ष्या द्वेष की बातें सुनती नहीं करती भगवद् भजन तू सत्संग से दूर भागती … Read more
कोयलिया भाव गीत
कोयलिया! तू कितनी प्यारी,तेरी बोली मधुर सुहानी,तेरे सुर में जादू बसता, हर डाली पे तेरा गाना! रंग तेरा काला भले हो, बोली तेरी मतवाली है,तेरी तान सुनकर कोयलिया,प्रकृति भी मुस्कराती हैपर जब तेरी कथा सुनी मैं, मन भीतर कुछ टूटा है,तू अपने अंडे नहीं सेती, कौओं के घर छोड़ा है। कहाँ गया तेरा मातृत्व,कहाँ तेरी … Read more
कुछ अपनी कह कुछ मेरी सुन
कुछ अपनी कह, कुछ मेरी सुनजरा मेरी सुन, मन की बातचार दिनों का जग मेला हैमन की बात जरा मेरी सुन▪️पहले भी हम झगड़ते थेमान मनौव्वल करते थेमन में नहीं पाला अनमनहंस कर गले मिलते थे▪️ज़िद पर हैं हम अड़े हुएपरिपक्व अभी हम नहीं हुएतर्क की है कमी नहींवितर्क में हम फँसे हुए▪️क्यों रखे मन … Read more