कुदरत का कर्ज

कभी किसी के आँसुओं की वजह न बनना,इससे बड़ा कोई पाप नहीं ॥ कभी किसी का दिल न तोड़नाइससे बड़ा कोई विश्वासघात नही । कुदरत का हिसाब बड़ा सख्त होता,हर दर्द ब्याज सहित जुड़ता जो दिया तुमने, वही लौट आएगा,कभी खुशी बन, कभी आघात बन जाएगा।धोखा, छल, या टूटा भरोसा कर्म का चक्र सब सिखा … Read more

भाव गीत कोयलिया

कोयलिया! तू कितनी प्यारी,तेरी बोली मधुर सुहानी,तेरे सुर में जादू बसता, हर डाली पे तेरा गाना! रंग तेरा भले काला हो, बोली तेरी मतवाली हैतेरी तान सुनकर कोयलिया,प्रकृति भी मुस्कराती हैपर जब तेरी कथा सुनी मैं, मन भीतर कुछ टूटा है,तू अपने अंडे नहीं सेती, कौओं के घर छोड़ा है। कहाँ गया तेरा मातृत्व,कहाँ तेरी … Read more

हे मेरे सुंदर वन

हे मेरे सुंदर वन,नीरव निर्जन वन,मोह रहा है मनहे मेरे सुंदर वन ॥चहके पंछी गगन में,भ्रमर गाए मधुबन में,मेंढक की मीठी तान,सर्पों की छुपी पहचानसब मिल रचते संगीत वन ॥तेरे हृदय में अनगिन प्राणी,पाते सुख की शरण कहानी,मुझको भी देता शांति अनूप,तेरा हर रंग, हर रूप मेरे वन ॥लकड़ी के पुल पर खड़ा मैं यहाँ,निहार … Read more

छोटे चूज़े

अंडे से निकला मैं प्यारा,मम्मी-पापा संग रहा संवारा।पंख उगे, पहली उड़ान भरी,आसमान में खुशियाँ भरी।साथी मिला, घोंसला सजाया,पाँच प्यारे चूज़े लाया।अब मैं स्वतंत्र, उड़ता नदियों में,सुख और शांति खोजूँ गीतों में।

वर्षा में प्रकृति और मिलन

वर्षा आई, मेघा छाए, मौसम हुआ ख़ुशनुमा,पोखर से निकले दादुर जी, सर्पों का सुंदर आहार हुआ।इक दूजे के बनने आहार, कीड़े-मकोड़े बाहर निकले,सबने मिलकर खानपान किया, हँसी-खुशी साथ चले बरसात की बूँदों में नाचे, पत्तों पर संगीत की छाया,धरती पर हर जीव मिला, समाजवाद का रंग लाया।कीड़े, मकोड़े, सर्प और दादुर, सबने बाँटी खुशी अपनी,बरसात … Read more

धरती की पुकार

विनाश के पथ पर चलते हम, दोष देते दैव कोअभी तो झाँकी भर देखी, काट रहे हरित वन को ।धरती का दोहन करते हम, पर्वत नदियाँ छोड़ कहाँलोभ अंधेरा बढ़ता जाए, बुझते जीवन के दीये यहाँविनाश के पथ पर चलते हम, दोष देते दैव को ।।सागर का क्रोध उमड़ता अब, तटों को तोड़ बहाता हैपिघल … Read more

साँझ की सरगम

साँझ की सरगम ✍️साँझ उतर आई है रंगों की चुनरी ओढ़े,पवन की सरगम में सपनों के गीत जोड़े ।मन की वीणा झंकार करे,प्रेम का दीप उजियारा छोड़े।चाँद की चुप्पी में बातें करें,तारों के संग मन रास करें।फूलों की महक में छुपा संदेश,हर धड़कन कहेप्रेम विशेष।साँझ उतर आई है रंगों की चुनरी ओढ़े,पवन की सरगम में … Read more

सूखा पर्वत और हरी घाटी

वो सूखा पर्वत कहता है ऐ मेरी प्यारी घाटी ! तू तो मुझसे सुन्दर है हरियाली से तू है भरी हुई पर मैं तो एक पौध हेतु तरसता हूँ हाँ चीड़ का कोई एक आध वृक्ष 🌲 उगाकर मैं भी गर्वित होता हूँ ।मुझे ये सूखा पन अच्छा नहीं लगता तुझे देख कर दिल बहलाता … Read more

जंगल बोलता है

कहो मुसाफ़िर ! कहाँ से आये हो घने जंगल के इस अंधकार में क्या ढूँढने आये हो ? क्या पाओगे यहाँ सिवाय पेड़ों के झुरमुटों के जहाँ वनस्पतियाँ अपने आप उगती हैं जहाँ वनस्पतियों का रस पीते हैं कीड़े,जहाँ पराग मकरंद मिलता है मधुमक्खियाँ रसपान करती हैं भौंरे स्वच्छंद गुंजायमान करते हैं हिंस्र प्राणी भी … Read more

प्रकृति

चलते चलते थक जाता हूँ फिर भी चलता रहता हूँ इच्छा तृप्त नहीं होती प्रकृति में विचरण करता हूँ । पत्तों पत्तों में पाता हूँ अद्भुत रचना सृष्टिकर्ता की जीवों जीवों में पाता हूँ अद्भुत रचना सृष्टिकर्ता की कण कण में अनुभूति होती उस परम ईश्वरीय सत्ता की ईश्वर की इस अनुपम सृष्टि को मैं … Read more