ख़ूबियाँ ढूँढो गीत

जो जैसा भी है अपनाओ, उसमें खूबियाँ ढूँढोथोड़ा सा प्रेम मिलाओ, प्रेम रस घोलो दोषों की धूल हटाओ, मन का दर्पण साफ़ करो,हर चेहरे में रब दिखेगा, बस इतना सा काम करो।काँटों के संग ही खिलते, बगिया में कोमल फूलरात अँधेरी चाहे जितनी, भोर करे कबूल,हर पत्थर में शक्ल छुपी है, मूर्तिकार की आस,विश्वासों की … Read more

समय भागता आगे आगे

समय भागता आगे–आगे,हम चलते धीमी चाल,साँसें कहतींरुक कर चल ले,मेरा भी तू रख ख्याल।तन बूढ़ा, पर मन जवाँ है,कहता हैदौड़ लगा ले आज,साँसें बोलींमुझे भूल गया?धड़कन चलती है बेताल।समय-समय का फेर है भाया,कभी तेज़, कभी सुस्त हुई चाल,समय को कौन बाँध पाया है,ऋषि-मुनि तक हुए बेहाल।जीवन-रथ पर चल निकला हूँ,कितनी शामें, कितने सवेर,धूप मिले या … Read more

समय के संग चल

चलत समय के संग रे प्राणी,काहे करे अभिमान।आया खाली, जाएगा खाली,बीच का सब सामान॥तन थक गया, साँसें गिनती,मन अब भी माया चाहे,पर भीतर से आवाज़ उठेछोड़ दे पथ, जो बाँधे॥न धन तेरा, न तन तेरा,न संग तेरा कोई,जिनको अपना कहता फिरा,वे भी छाया होई॥सुख-दुख दोनों एक समान हैं,आते-जाते मेहमान,जिस दिन मन ने जान लिया यह,उसी … Read more

समय और मैं वैराग्य भाव

समय तो चलता अपने पथ पर,मैं भी चलताधीरे, चुपचाप,न उसे थाम सकूँ, न रोक सकूँ,बस साक्षी बन कर करूँ प्रताप।तन शिथिल है, साँसें सीमित,मन अब भी भटके संसार,पर भीतर कोई स्वर कहता“छोड़ मोह, ये जग व्यवहार।”जो आया था, वह चला गया,जो मिला था, वह भी क्षणिक,राह में छूटे अपने–पराये,सब थे केवल जीवन-चित्रिक।न दौड़ अब है, … Read more

आशा का दीप दोहे आधारित

रही आस कह श्वांस से,धीरज धरना सीख |बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख ॥टूटी नाव भरोस की, लहरों से क्या हार,जो थामे प्रभु का चरण, पहुँचे भव से पार।आँधी बोले दीप से, जलना मत तू दीख बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख ॥सूखी धरती कह रही, बादल का विश्वास,धीरज की हर … Read more

आस कहे श्वास से

आस कहे श्वास से, धीरज धर ले भाई,बिन माँगे मोती मिलें, माँगे भीख न पाई।जो खोजे बाहर जगत में, खाली लौटे हाथ,अंतर घट में जो उतरे, पाए हरि का साथ।झूठी आस न पाल रे मन, टूटे सब परछाई,बिन माँगे मोती मिलें, माँगे भीख न पाई।न तेरा कोई, न मेरा कोई, माया का है खेल,नाम बिना … Read more

नियति और कर्म सवैया

नियति अडिग पर्वत सम दिखती, कर्म प्रबल धारा बन जाता मन संकल्पी हो तो राही, बाधा से भी मार्ग रचाता भाग्य लिखे जो धूमिल रेखा, पुरुषार्थ उसे स्वर्ण बनाता जिसने श्रम की ज्योत जलायी, अंधियारा सब दूर हटाता।।बीज पड़े पथरीली धरती, फिर भी अंकुर फूट निकलते।हाथों की मेहनत से सूखे, वृक्ष हरे रसधार पिघलते।कर्म सजीव … Read more

झूठ का जीवन रास न आये मन

रे मन झूठ का जीवन रास न आएसाँसों की ये माला टूटत जाए।मन व्याकुल है, भीतर जंग लगेकाहे को माटी में मोल रचे, कपड़ा–रोटी–छप्पर का पल भर का यह साज सजे, शानो शौकत मिथ्या ये शानकल तक अपना, आज परायजिन पर गुमान किया था तूनेसब यम के द्वार बिखर जाए॥जीवन भर जो जोड़–घटायावैद्य की चौखट … Read more

कल करे सो आज कर

साष्टांग नमन श्रेष्ठ चरणों में,जिनसे उजियारा जग में छाया,आज फिर सूरज मुस्काया है,ईश्वर ने नया जीवन दिलाया।भाग रहा है समय निरंतर,पल–पल फिसलता हाथों से,चौबीस घंटे सबको मिले हैं,फिर भी कुछ खाली रह जाते हैं।कल का सूरज दिखे न दिखे,इसका कोई भरोसा नहीं,अगले क्षण की साँस भी हमको,मालूम नहीं यह होगी कि नहीं।कबीर कहें सुन लो … Read more

तू बस धर्म निभा ओ प्राणी

तू बस धर्म निभा ओ प्राणी,फल की चिंता छोड़ दे।कर्म ही है तेरा अधिकार,मत सोच जीत या हार॥हर मन भीतर कुरुक्षेत्र सजा है,इच्छा–कर्तव्य युद्ध रचा है।कभी धुंध छाई, राह न सूझे,डगमग डोले जीवन रथ है॥तू बस धर्म निभा ओ प्राणी,फल की चिंता छोड़ दे।भीतर बैठे कृष्ण कन्हैया,सबका लेखा जोड़ दे॥मन का अर्जुन प्रश्न उठाए,क्यों ये … Read more