मैं और मेरी चिड़िया

मैं और वो मेरी चिड़िया

दोनों घंटों बातें करते हैं

वह डाल पर बैठी रहती है

मैं छत पर बैठा रहता हूँ..

छत पर बैठा योगा करने

ध्यान मेरा भंग हो रहा

टुकुर टुकुर ताकती रहती है

प्रेम प्रदर्शित करती है

मुझ पर ही नज़र गड़ी उसकी

आकृष्ट मुझे वो करती है

मैं उसे देखता रहता हूँ

वह मुझे देखती रहती हैं

आख़िर कैसा बंधन है यह

मोह पाश में मुझे बांध लिया

बहुत प्यारी लगती तू चिड़िया

मेरे पलकों में बसती है

मानो कहती है वह मुझसे

आओ बैठ कर बात करे

बोली भाषा अलग सही

सांकेतिक भाषा में बात करे ..

दोस्त बन जाओ तुम मेरे

बहुत मज़ा हमें आयेगा

इंसानों जैसा छल कपट नही

निःस्वार्थ प्रेम तुम पाओगे..

जग जाना भोर में जल्दी ही

भोर का मौसम सुहाना होता है

गीत मधुर मैं गाऊँगी

मन की थकान मिटाऊँगी

दे देना कुछ अन्न के दाने

और मिट्टी पात्र में थोड़ा जल

उदर मेरा भर जायेगा

झूम कर गाना गाऊँगी..

मैं और वो मेरी चिड़िया

दोनों घंटों बातें करते हैं..

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