नयी सोच गीत

कहाँ गये पुराने गीत सुहाने सोलहवें सावन के वे गानेगुजरी फ़िल्मी ये बातें हैं आया इक नया जमाना है.नयी उपज की नयी सोच है आधुनिक शिक्षा का ये प्रतिफल है जीवन जीना स्वच्छंद रूप से दख़लंदाज़ी नहीं पसंद है तीस के पहले शादी नहीं होती ना नुकुर उस पर भी होती माँ बाप की मर्ज़ी … Read more

पुष्प की अभिलाषा

हे माली ! चुन लो मुझे देर करो न कहीं डाल से गिर न पड़ूँ मैं तुम्हारी माला में गुँथ जाऊँ प्रभु के श्री चरणों में चढ़ूँ मैं जाने कब दिन बीत जायेगा घन घोर अंधेरा घिर जायेगा प्रभु पूजा की बेला तब तककब चुपके से निकल जायेगी । अपने में सुन्दर रंग रूप धरा … Read more

मेरी मोबाइल मेरी जीवन साथी

मित्रों ! मेरी एक अच्छी आदत है मैं अपनी मोबाइल को ज़्यादा परेशान नहीं करता सुबह जब योगा करता हूँ एक घंटे के लिये उसे डिस्टर्ब्ड नहीं करता पूजा करता हूँ तब वह आराम फ़रमाती है दोपहर में झपकी लेता हूँ बग़ल में वह भी सो जाती है वह भी करे तो क्या करे .. … Read more

हे हरि कहाँ जाऊँ तुम्हें छोड़ कर

हे प्रभु ! कहाँ जाऊँ मैं तुझे छोड़ कर कोई और ठिकाना नहीं जगत में भीतर भरा है खोट ही खोट अपनी करनी अपने हाथ से बिगाड़ीकहाँ जाऊँ मैं तुझे छोड़ कर । मैं तो तुझसे विमुख रहा नेत्र होते हुए भी दृष्टि हीन रहापर कौन हे तेरे सिवाय मेरे कहाँ जाऊँ मैं तुझे छोड़ … Read more

मुझे तेरे कर कमलों की चाह

हे प्रभु ! मुझे तेरे कर कमलों की चाह जिन कर कमलों से शिव धनु तोड़ादूर किया संदेह जनक का जिन कर कमलों से गुह निषाद को भेंटा मुझे उन्हीं कर कमलों की चाह ।जिन कर कमलों से जटायु को लीन्हा पितृ समान पिण्ड दान दिया जिन कर कमलों से भरत को अंक लगाया मुझे … Read more

भैरव रूप शिव स्तुति

विभत्स हूँ निर्लेप हूँसमाधी में मैं चूर हूँतांडवित- नृत्य पर सृष्टि का संहार हूँ । मैं रुद्र हूँ ! मैं रुद्र हूँ ! मैं रुद्र हूँ ! मैं रुद्र हूँ त्रिनेत्र हूँ काल का कपाल हूँ श्मशान में हूँ नाचता मृत्यु का मैं ग़ुरूर हूँ । मैं रुद्र हूँ ! मैं रुद्र हूँ ! मैं … Read more

तेरी भक्ति बिन मोह न जाये

हे हरि ! तेरी भक्ति बिन मोह न जाये ..प्रभु कृपा बिन न मोह दूर होन यह ग्रन्थिन माया जायेवाचक चाहे कितना ज्ञानी हो भव सागर पार कर न पाये । दीन दुखी जैसे भूख के मारे खूब तड़पे और चिल्लाये चित्र टंगे हो गृह कल्पवृक्ष के चित्र देखकर भूख न जाये । षँटरस भोजन … Read more

मन का भ्रम भजन

हे हरि !तेरे कृपा बिन मन का भ्रम न जाये बिन बांधे मैं स्वयं बंधा हूँ तोते की तरह परवश पड़ा हूँ परमात्म तत्व ज्ञान बिना पीड़ा से मुक्ति कैसे पाये । वेद गुरू संत और स्मृतियाँ एक स्वर से सब यही कहते हैं यह दृश्य मान जगत असत् है असत् को सत् समझ न … Read more

मैं अवगुण की खानी भजन

प्रभु ! क्यों लगाऊँ दोष तुम्हें, मैं ही अवगुण की खानी..प्रभु क्यों लगाऊँ दोष तुम्हें, मैं ही हूँ अवगुण की ख़ानी सार नही जब बाँस के भीतर, बेचारा चंदन सुगंध कैसे भरे ।करील लगाये दोष बसंत को, हरा भरा मुझे नहीं करता है हत भाग्य असल है वह करील,बिन पत्ते हरा भरा कैसे करे ।ईश्वर … Read more

जीवन गणित

जीवन “गणित” हैसांसें “घटती” हैअनुभव “जुड़ते” हैअलग अलग “कोष्ठकों” मेंबंद हमबुनते रहते हैं “ समीकरण” लगाते रहते हैं “गुणा”- “भाग”जबकिअंतिम सत्य “शून्य है”