औघड बाबा तांडव फाग

डम-डम डमरू गूँज उठा जब, काँपा काल-कपाल।भस्म-विभूषित देह महेश की, दहके दिग-दिग ज्वाल॥चिता-राख की उड़ती होरी, नभ पर रचे वितान।जग की झूठी शान जला कर, हँसे श्मशान-भवान॥त्रिपुंड अंकित भाल प्रखर, दृग में विद्युत-रेखा।एक दृष्टि में भस्म करैं, माया-जाल सहेजा॥मृग चर्म, व्याघ्रचर्म लहरत, डोले डमरू-ताल।प्रलय-नर्तन कर औघड़ बोलेसब जग माटी लाल!”॥जहाँ बुझी हर आस मनुज की, … Read more

उद्धव व्रज में

ऊधव मन में ज्ञान लिये, मथुरा से ब्रज आये,योग-वियोग की बात कहें, गोपिन को समझाये।गोपिन बोलीं “ऊधव! पहले बदलो अपनी दृष्टि,जहाँ प्रेम है वही नारायण, वहीं बसती है शक्ति।”गोपिन बोलीं “कहो ऊधव! कैसा योग सिखाओगे?जिस मन में बस श्याम हमारे, उसे कहाँ ले जाओगे?नयनों में नंदलाल बसे हैं, श्वास-श्वास में सृष्टिप्रेम ही शक्ति, प्रेम ही … Read more

रामायण क्या है

“रामायण” क्या है? रामायण क्या है?रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं,यह मनुष्य के भीतर छिपेश्रेष्ठतम गुणों का आईना है।यह वह दीप हैजो अंधकार में नहीं,अहंकार में जलता है।रामायण पढ़ने की नहीं,जीने का महा ग्रंथ है।यह बताता है किजीवन में भोग से नहीं,त्याग से ऊँचाई मिलती है।यहाँ अधिकार नहीं,कर्तव्य बोलता है;यहाँ स्वयं नहीं,दूसरा पहले आता है।यहाँ पति … Read more

निर्गुण भजन हे प्रभु तू ही दिखे हर मोड़

पीछे मुड़कर देखूँ तो प्रभु,तू ही दिखे हर मोड़सुख-दुःख दोनों तेरे ही रंग,जीवन तेरी डोरबचपन बीता खेल-खेल में,नाम तेरा अनजान,मिट्टी में जो हँसी बिखेरी,वही बनी पहचान।आज समझ आया जीवन क्या,कल था जो कुछ औरपीछे मुड़कर देखूँ तो प्रभु,तू ही दिखे हर मोड़यौवन आया, मन भरमाया,माया का संसार,सपनों की पतंग उड़ी ऊँची,टूटी बारंबार।ठोकर देकर तूने ही … Read more

मीरा के गिरधर गोपाल भजन

मेरे तो गिरधर गोपाल सखा, दूजा न कोई जानूँ।देह–भेद सब मिथ्या लागे, प्रेम बिना कुछ न मानूँ॥मेवाड़ महल, राज वैभव,सब तज आई मीराँ,कुल की मर्यादा, लोक लाज,गिरधर पर वार दी पीराँछाले पैरों, प्यास हिय में,नाम रटूँ दिन-रैनूँ॥मेरे तो गिरधर गोपाल सखा॥वृन्दावन पहुँची, संत द्वार पर,दर्शन की अभिलाषा,गोस्वामी जी नियम कह बैठे,“स्त्री से मिलना बाधा”मीराँ हँसी, … Read more

जनमेजय व्यास संवाद

व्यास कहे जनमेजय से होनी का यह गूढ़ विधान,कर्म हमारे हाथों में हैं, फल पर नहीं हमारा मान।अभिमन्यु के वंश में जन्मे, राजा परीक्षित वीर,उनके पुत्र जनमेजय, तेजस्वी, साहसी, गंभीर।अहंकार का बादल छाया, मन में उठा अभिमान,व्यास वचन पर प्रश्न किया, भूल गया वह ज्ञान । बोले राजा गर्व में आकर, “मैं होता उस काल,महाभारत … Read more

द्रौपदी का बहू उत्तरा को सीख

जब टूटें जग के सब नाते, मौन हो जाए संसार । तब केवल एक सहारा, कृष्ण नाम अविकार ॥बैठी थी पलंग पर उदास सी, उत्तरा भोली नारिद्रौपदी ने स्नेह से समझाया, जीवन का विस्तारकहा बेटी न देखो रिश्ते-नाते, न धन न परिवार,विपदा में जो साथ निभाए, वही सच्चा आधार।सभा बीच मेरी लाज लुटी थी, छूटा … Read more

निर्गुण भजनः दुनिया इक रंगमंच है

दुनिया इक रंगमंच है, निभा रहे किरदार।आते-जाते काल में, मिलते रूप हज़ार ॥ राजा बने, फकीर बने, पल में धन-दरिदार,हँसते-रोते जीवन कटे, है क्षणिक विस्तार।नाम बिना सब सूना लगे, टूटे मोह-आधार,दुनिया इक रंगमंच है, निभा रहे किरदार।तन की माया, मन का छल, सब झूठी शान,साँस की डोरी टूटते ही, रह जाए पहचान।साथ न जाए कुछ … Read more

भक्त भक्ति और भगवान

भक्त, भक्ति और भगवान, तीनों एक ही धारा,जिसने प्रभु की भक्ति पाई, जीवन उसका निस्तारा॥मन में प्रेम हो सच्चा, तो दूरी मिट ही जाती,अंतर से जो पुकारे, उसको राह मिल जाती।पल में भर दें जीवन में, आनंद का फुहारा॥भक्त, भक्ति और भगवान, तीनों एक ही धारा॥भक्ति दीपक जैसी, खुद जल कर जग को बाँटे,हर दुखियारों … Read more

भजन राम नाम रस

राम नाम रस पी ले रे मन, तेरे दुख सब मिट जायेंगेदुख के बादल चाहे जितने, एक क्षण में सब छँट जायेंगे माया के मेले में भटका मन, इधर-उधर तू डोल रहासुख की चाह में दौड़ता फिरता, पथ से दिग्भ्रमित हो रहाएक घड़ी को बैठ ज़रा मन, झाँक ज़रा तू भीतर अपनेराम नाम रस पी … Read more