आ जाओ मेरी गौरैया

आ जाओ मेरी गौरैया ..२ घर के मुँडेर पर बैठी गौरैयाचीं चीं करके पास आ जाती कहाँ गयी वो.. नन्हीं जान यादें उसकी ..मुझे सताती .ठहरी ये तो नादान एक पंक्षी क्रूर दुनिया से रही.. अन्जान विलुप्त हो गयी प्यारी गौरैया नाराज़गी किससे.. बतलाती तिनका तिनका जोड़ती रहती घर में ही कहीं घोंसले बनाती भोजन … Read more

अंत में केवल हम दो होगे

अंत में केवल हम दो होगेचाहे जितना लड़ लो, चाहे जितना झगड़ लो, पर ये मत भूलना अंत में केवल हम दो होंगे । घुटने जब दुखने लगेंगे झुकने की शक्ति क्षीण होगी, बाँह पकड़ कर सहारा देने के लिए अंत में केवल हम दो होगे।मेरा मेडिकल रिपोर्ट नार्मल है कोई चिंता की बात नही, … Read more

आज के दुशासन

अजीब हालात जमाने की लोग दिल से खेल जाते हैंतबाह करके ज़िन्दगी मासूमों की शर्म नहीं खाते हैं ।खेल यह चौसड से कम नहीं फेंकते पाँसे शकुनि जैसे फँसा लेते चंगुल में जीवन भर के लिये घाव दे जाते हैं ।दक्ष हैं ये अपनी चालों में बहुत शातिर दिमाग़ रखते हैंबुनते जाल मकड़ियों जैसे मकड़जाल … Read more

हम बदल रहे हैं

हाँ हम बदल रहे हैं चोटियां छोड़ी, पगड़ी छोड़ी तिलक छोड़ा और चंदन छोड़ाकुर्ता छोड़ा , धोती छोड़ीयज्ञोपवीत छोड़ा, संध्या वंदन छोड़ाहाँ हम बदल रहे हैं.रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा महिलाओं ने साड़ी छोड़ी, बिछिया छोड़ी, चूड़ी छोड़ी चुनरी छोड़ी, मांग बिन्दी छोड़ीहाँ हम बदल रहे हैं..बच्चे छोड़े, आया पकड़ी संस्कृत छोड़ी और हिन्दी छोड़ी,श्लोक … Read more

कर्म पथ

चलता रहूँ कर्म पथ पर, पग पीछे मेरे न हटेसच्चाई की राह पर, लेखनी मेरी कभी न डिगे ॥ कर्म ही तो धर्म हमारा, गीता ने यही सिखाया है कृष्ण के उपदेश पर ही, अर्जुन ने गांडीव उठाया है अधर्म बोलता है जहाँ प्रभु अवतरित आ होते हैं रच देते हैं महाभारत व्यास आदि कवियों … Read more

कान्हा की चित्रकारी

चित्रकारी कर रहे कृष्ण काश इन्हीं रंगों में घुल जाता अहो भाग्य यदि ऐसा हो जाता अपना जन्म धन्य मैं पाता रंग तूलिका जो प्रभु हाथ है कितनी भाग्य शालिनी है काश उसकी डंडी मैं बन जाता अपना जन्म धन्य मैं पाता.रंग पिरोयें है जिन रंगों से वे रंग न मिटने वाले हैं काश इन्हीं … Read more

मेरे बडे पिताजी

आपका हँसता हुआसबको हँसाता हुआ, हरफ़नमौला व्यक्तित्व, विपरीत परिस्थितियों में भी तटस्थ रहने वाला, अपनी धुन में ही रमता हुआ एक सिद्ध योगी जैसा दिव्यमान चेहरामेरी स्मृतियों में हुबहू आज भी सब कुछ याद आता है .शास्त्र पारंगत, वेद विशारद,भागवत वाचक, शास्त्रार्थ प्रेमी, रामचरितमानस के कुशल चितेरे, अद्भुत गायन, अद्भुत शैली सब कुछ तो कंठस्थ … Read more

बेटी की पीड़ा

अरे भेड़ियों ! अधम हो तुम, नज़र बेटियों पर डालते हो क्या माँ बहन नहीं है तेरे घर,जो राह बैठे तकते रहते हो बेटियों को समझ रहे खिलौना,मर्जी से अपनी खेल रहेतार तार करते उनकी इज़्ज़त, स्वयं को मर्द समझते हो । मर्द नहीं तुम कायर हो, मर्दों का तो यह होता कृत्य नही नारी … Read more

क्या क़ुसूर था मेरा

क्या क़ुसूर था मेरा, सजन मेरे क्यों छोड़ चलेक्या क़ुसूर था मेरा, सजन मेरे क्यों छोड़ चलेब्याह कर लाये मुझको, डोली पहुँची पिया के घर,शोक संदेशा घर में आया, नहीं रहे मेरे प्रिय वर।निशब्द रही, किंकर्तव्यविमूढ़, सपने चकनाचूर हुए,हाय विधाता क्या क़ुसूर था, आप मेरे विपरीत हुए।बीच मँझधार में नाव फँसी, पतवार छोड़ निकल चले,अंत … Read more

जय जय हिन्दी

हिन्दी हमारी मातृभाषा, हिन्दी से हम परिभाषित ।बहुतायत बोली जाती, राज्य हो या केन्द्र शासित ॥विदेश में भी हम जाते हैं, हिन्दी से पहचाने जाते हैं ।दौड़ कर लोग पास आते हैं, मिलकर गले लगाते हैं ॥ गर्व है अपनी हिन्दी पर, जय हिन्दी जय हिन्दुस्तान ।हिन्दी हमारी जननी है, हमारी संस्कृति की पहचान ॥ … Read more