हम बदल रहे हैं

हाँ हम बदल रहे हैं

चोटियां छोड़ी, पगड़ी छोड़ी

तिलक छोड़ा और चंदन छोड़ा

कुर्ता छोड़ा , धोती छोड़ी

यज्ञोपवीत छोड़ा, संध्या वंदन छोड़ा

हाँ हम बदल रहे हैं.

रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा

महिलाओं ने साड़ी छोड़ी,

बिछिया छोड़ी, चूड़ी छोड़ी

चुनरी छोड़ी, मांग बिन्दी छोड़ी

हाँ हम बदल रहे हैं..

बच्चे छोड़े, आया पकड़ी

संस्कृत छोड़ी और हिन्दी छोड़ी,

श्लोक छोड़ा, माँ की लोरी छोड़ी

बच्चों के सारे संस्कार छोड़

हाँ हम बदल रहे हैं

सुबह शाम की राम राम छोड़ी

पांव लागूं, चरण स्पर्श छोड़ा

संयुक्त परिवार छोड़ा

रीति परंपरा छोड़ी

हाँ हम बदल रहे हैं

लुप्त हुई

गुरुकुल की शिक्षा

यज्ञ, शस्त्र-शास्त्र सब छूट गये

और कितना बदलेंगे

हाँ हम बदल रहे हैं ..

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