आ जाओ मेरी गौरैया

आ जाओ मेरी गौरैया ..२

घर के मुँडेर पर बैठी गौरैया

चीं चीं करके पास आ जाती

कहाँ गयी वो.. नन्हीं जान

यादें उसकी ..मुझे सताती .

ठहरी ये तो नादान एक पंक्षी

क्रूर दुनिया से रही.. अन्जान

विलुप्त हो गयी प्यारी गौरैया

नाराज़गी किससे.. बतलाती

तिनका तिनका जोड़ती रहती

घर में ही कहीं घोंसले बनाती

भोजन समय साथ आ बैठती

गिरे अन्न को .खाती रहती .

जिस घर में रहती थी.. गौरैया

सुख समृद्धि घर में आती

दुर्भाग्य बदलती .वो गौरैया

भाग्य को वो ..सबके संवारती ..

कितना क्रूर हुआ. इंसान

कहाँ गयी वो .नन्ही जान

चित्र में ढूँढते आज..हम गौरैया

तेरी यादें मुझे बहुत सताती

आ जाओ मेरी.. . गौरैया

मिलकर .. तुम उड़ जाना

नहीं रहा वो .पुराना ठिकाना

जहां अपना घोंसला बनाती

आ जाओ मेरी गौरैया.२

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