कान्हा की चित्रकारी

चित्रकारी कर रहे कृष्ण

काश इन्हीं रंगों में घुल जाता

अहो भाग्य यदि ऐसा हो जाता

अपना जन्म धन्य मैं पाता

रंग तूलिका जो प्रभु हाथ है

कितनी भाग्य शालिनी है

काश उसकी डंडी मैं बन जाता

अपना जन्म धन्य मैं पाता.

रंग पिरोयें है जिन रंगों से

वे रंग न मिटने वाले हैं

काश इन्हीं रंगों में मैं घुल जाता

अपना जन्म धन्य मैं पाता

राधे बसती कृष्ण हृदय में

तूलिका कान्हा की स्वतः चलती है

काश तूलिका मैं बन जाता

अपना जन्म धन्य मैं पाता

राधा कृष्ण की मोहिनी मूरत

मेरा चित्त चुराती है

काश एक दर्शन मैं पाता

अपना जन्म धन्य मैं पाता

प्रेम अलौकिक हैं दोनों की

दिव्य चित्र बिन देखे खिंचती है

काश रंग थाल मैं बन जाता

अपना जन्म धन्य मैं पाता..

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