अक्षय पात्र

हरे कृष्ण हरे मुरारी, जय हो महिमा भारी,भक्त पुकारे सच्चे मन से, दौड़ें श्री बिहारी॥दुर्योधन का मन बहक उठा, बोला मुनिवर जाओवन में रहते पांचों पांडव, उनका आतिथ्य पाओ।दुर्वासा संग शिष्य अनेक, पहुँचे पांडव कुटिया द्वार,कहें “भोजन दे हे कुन्तिनंदन!”, सब पड़ गए विचार॥अक्षय पात्र था द्रौपदी के, सूर्य देव उपहार,दिन का समय गया था … Read more

विजेता

कौन रहा विजेता सिकन्दर महान??वह भी तो ख़ाली हाथ गया था अपने वतन भी न पहुँचा समय बहाकर ले जाता हैनाम’ और ‘निशान’ कोई ‘हम’ में रह जाता हैऔर कोई ‘अहम’ में सिर्फ दुनिया के सामने जीतने वाला ही विजेता नही होताकिन रिश्तों के सामने कब और कहाँ पर हारना हैयह जानने वाला भी विजेता … Read more

माँ की ममता

नयनों में बसे वो पल भुलाऊं कैसेममता में डूबे वो पल भुलाऊं कैसे ..वह डाट वह सीख भाती थी मुझे नाराज़गी मां की सताती थी मुझे वे अनमोल पल भला पाऊँ कैसे नयनों में बसे वो पल भुलाऊं कैसेहर लफ़्ज़ याद है कहानी की तरह हर हिदायत याद ज़ुबानी की तरहयादों के काँटे भला निकालूं … Read more

सूर्य देव और धरा

कौन-सी है भला प्रीत तेरी,रंग-रंगीली रीत तेरी।धरा से मिलन की चाह में,बंधी है जैसे प्रेम डोरी॥भोर होते ही उदय हो जाते,लालिमा बिखेर धरा को सजाते।गगन से उतर चूमते क्षितिज,सुनहरी करतीं रश्मियाँ धरित्री को॥श्रृंगारी हो जाती ये धरती,तेरी किरणों की सौर साड़ी ओढ़ी,पिया-मिलन को आतुर जैसी,गाँव की गोरी, शर्मीली, जोड़ी॥कौन-सी है भला प्रीत तेरी,रंग-रंगीली रीत तेरी।धरा … Read more

रंगमंच

रंगमंच है यह दुनिया, इसके रंग हज़ारजैसी भी है ज़िन्दगी, जी लो ख़ुशी से यार अपनी अपनी है भूमिका, अपना है किरदार कहीं कमी न रह जाये, खुल कर खेलो यार नेपथ्य में जब हम जाये, लोग याद करें हमको एक सितारा रहा चमकता, छिप गया वह यार । चलते फिरते गले लगायें ,प्रेम से … Read more

लव कुश

वाल्मीकि का पावन आश्रम, दो बालक वहाँ पर पलते थे लव कुश उनके नाम हैं सुन्दर, बहुत मोहक वे दिखते थे।अश्वमेध का घोड़ा पकड़ा, लाकर एक वृक्ष से बांध दिया दी खुली चुनौती बालकों ने, अवध सेना से संग्राम किया । शत्रुघ्न आये, लक्ष्मण आये, भरत जी आये हनुमंत संगकिया मूर्छित तीखे तीरों से, पड़े … Read more

मेरी सोच

नीरवता की गहराई में मग्न अकेले रहता हूँ बैठ जाता हूँ झील किनारे प्रकृति को झांकता रहता हूँ.हरे भरे ये वृक्ष सुहाने मेरे मन को भाते हैं खिले हुए ये पुष्प सुगंधित मेरे मन को ललचाते हैं कहाँ से पाया रंग रूप यह सुन्दर इसे सोचता रहता हूँ नीरवता की गहराई में मग्न अकेले रहता … Read more

प्रकृति संरक्षण

प्रकृति संरक्षण ✍️प्रकृति का दोहन करने वालों, जरा सजग तुम हो जाओ कहाँ पाओगे शरण भला, एक बार ध्यान इस पर दे दो प्रकृति है तो जीवन है, अन्यथा भूमि कंकड़ और पत्थर है हरियाली है इसकी धड़कन, धड़कन पर न तुम घात करो जल वायु मिलती है प्रकृति से, जो जीवन का है केन्द्र … Read more

चलती जा तू ज़िन्दगी

जैसी भी है तू ऐ ज़िंदगी, चलती जा चलती जा ..मत फँस दुनियादारी में, सब धरा यहीं रह जाता है जो बीत गया सो बीत गया, वह पल वापस नहीं आता है मत रो बीती बातों पर, भविष्य की तू चिंता न कर वर्तमान में जीना सीख ज़िन्दगी, कर्म पथ पर चलती जाजैसी भी है … Read more

रत्नाकर

हे रत्नाकर !!अदभुत है तेरा स्थिर धर्म । तेरे तट पर बैठा, नमन तुझे मैं करता हूँ ,देख रहा हूँ तेरा अद्भुत वृहत स्वरूप,तेरा सुंदर स्थिर धर्म !! असंख्य रत्न मणियाँ, हीरे जवाहरात, गहरे हृदय में छिपाये रखते हो, पर मृत शरीर को बाहर फेंकते अदभुत है तेरा स्थिर धर्म । सारी नदियाँ तुझसे मिलती … Read more