सितारों तुम जमीं आओ

सितारों तुम ज़मीं आओ, दूर से ही चमकते हो निर्निमेष निहारता हूँ बहुत प्रिय तुम लगते हो। ढूँढता हूँ स्वजन अपने, तुममें ही वे कहीं होंगे छिपाओ न तुम उनको, वे भी तो व्यथित होंगे कहाँ पर लोग जाते हैं निशाँ कोई नहीं दिखता झिलमिलाते हो तुम ऐसे, स्वजन मेरे लगते हो । जीवन ये … Read more

कैसे उठइली अपुना घुंघुटवा

हम न उठइली अपुना घुंघुटवा आजु तो मोरी सेज सजी हैलागत पर यह कांटन से भरी है, कइसन दिखयली बदरंग चेहरवामाफ़ी दइ देवउ हमरा बलमवां.बहुतय अरमान तोहरे दिल मंह है कवन पति नहीं चाहत सुन्दर मेहरिया जन्मत हम कुरूप भइन है भार भइन बाबुल घर अंगवा .चेहरे पर चेहरा लइकै जन्म भवा है जन्मत हम … Read more

जीवन की सच्चाई

एक ही बार नहीमैंने कइयों बार देखी बागवां मूवी..हृदय स्थल को मेरे छू गयी वह तो एक मूवी थी पर है यही जीवन की सच्चाई मूवी भी तो समाज का प्रतिबिंब होती है । सोच रहा हूँ ऐसी परिस्थिति कभी न कभी तो जीवन में आती ही हैकोई साथ साथ तो जाता नहीकैसा महसूस होता … Read more

जन्म सार्थक कैसे कर पाऊँ

जन्म सार्थक कैसे कर पाऊँहे हरि ! तेरी कृपा कैसे मैं पांऊ.हर क्षण याद करूँ प्रभु,छोड़ तुम्हें भजन करूं मैं किसको मानव तन पाया कुछ न कीन्हा, दोष भला लगाऊँ किसको मन चंचल है नहीं है वश में, क्षण भर एकाग्र नहीं होता है स्वतंत्र भ्रमण यह करता है, कैसे वश में इसको लाऊँमुझसे अच्छा … Read more

बेबो के नाम मेरे शब्द

ओ बेबो ! ओ बेबो ! ओ मेरी प्यारी बेबो .तू तो है मेरी प्यारी बेबो,,,..मैं तेरा पप्पी हूँइसी नाम से मुझे पुकारती, नाना मुझको नहीं कहती हैइसकी भी एक कहानी है, बचपन ऐसा ही होता है बड़ी होगी तो सब जानेगी, शब्दों में क्या रखा है न बेबो ओ बेबो ! ओ बेबो ! … Read more

कविता

कविता लिखना कला ✍️विचारों की श्रृंखला जब मन में खिलखिलाती हैसृजन होते हैं सुन्दर भाव, तब कविता बनती है ..कुम्हार की तरह मिट्टी चुनता है कवि,कूटता है, पीसता है, छानता है क्रमवार बार बार करता है, साँचे में ढालता हैतब एक सुन्दर कविता बनती है ..विचार आते हैं, जाते हैं, लुप्त हो जाते हैं, इन्हें … Read more

ड्योढ़ी का बँटवारा

ले ले भाई सब कुछ तू पर इस ड्योढ़ी का बँटवारा मत कर । यहीं पर मेरा बचपन बीता था यहीं पर तेरा बचपन बीता था ड्योढ़ी पार तू कर नहीं पाता था खींच कर तुझको पार कराता था । यहीं पर अम्माँ बैठी रहती थी यहीं पर बप्पा बैठे रहते थे, पुरखों की यादें … Read more

बचपन की पगडंडियाँ

खड़ा हुआ हूँ गाँव के इक छोर पर, देख रहा हूँ गाँव का बदला बदला स्वरूप ।ढूँढ रहा हूँ अपने बचपन की पगडंडियों कोजिन पर मैं चलता था जिन पर मेरा बचपन बीता था । कहाँ गयी वे पगडंडियाँ कहाँ गया वह बरगद का वृक्ष, जिनकी छाँव में बैठा करता था खेला कूदा करता था … Read more

आँख से आँसू कब झरते हैं

आँखों में अश्रु स्रोत कहाँ से आँख से आँसू क्यों झरते हैंझर झर बहते झरने जैसे थामने से भी नही थमते हैं .भावनायें बहुत प्रबल होती हैं भाप बनकर उड़ने लगती हैं उमड़ घुमड़ बादल बन जाते तब आँखों से आँसू झरते है पत्थर दिल भी रो देते हैं दया भाव जब हृदय में आता … Read more

प्रेम गीत

प्रेम नापने की वस्तु नहीं, होता इक सुखद अहसास हैं न तौलें इसे कभी तराज़ू में, प्रेम तो चाहता विश्वास है ।मीठी बोली किसे न भाती, आत्मीयता का बोध कराती स्नेह व्यवहार सदा एक जैसा हो, प्रेम होता निःस्वार्थ है । प्रेम बिना यह जग है सूना, प्रेम तो जगत का आधार है प्रेम समाया … Read more