सितारों तुम जमीं आओ
सितारों तुम ज़मीं आओ, दूर से ही चमकते हो निर्निमेष निहारता हूँ बहुत प्रिय तुम लगते हो। ढूँढता हूँ स्वजन अपने, तुममें ही वे कहीं होंगे छिपाओ न तुम उनको, वे भी तो व्यथित होंगे कहाँ पर लोग जाते हैं निशाँ कोई नहीं दिखता झिलमिलाते हो तुम ऐसे, स्वजन मेरे लगते हो । जीवन ये … Read more