प्रकृति संरक्षण ✍️
प्रकृति का दोहन करने वालों, जरा सजग तुम हो जाओ
कहाँ पाओगे शरण भला, एक बार ध्यान इस पर दे दो
प्रकृति है तो जीवन है, अन्यथा भूमि कंकड़ और पत्थर है
हरियाली है इसकी धड़कन, धड़कन पर न तुम घात करो
जल वायु मिलती है प्रकृति से, जो जीवन का है केन्द्र बिन्दु
प्रहार कर रहे अपने ही जीवन पर, इस पर जरा ध्यान दे दो
स्थिति विकट रूप ले रही दिन प्रतिदिन, इसका भान नही
आग का गोला बन रही है पृथ्वी, तपन का अहसास नही
कब तक एसी में बैठोगे,कब तक बोतल से काम चलाओगे
अस्तित्व बचाने की आ रही घड़ी, इसका संज्ञान ले ले लो
ईंट पत्थर का महल दरकेगा,अंगारों की नभ से वर्षा होगी
पेड़ पौधे ही यदि नही होगे,आखिर कहाँ पर छाँव पाओगे
रे मानव ! चेत जा, चेत जा, अभी भी स्थिति हाथ में है तेरे
कहीं विस्फोटक यह न जाये,जरा इस बात पर ध्यान दे दो