नयनों में बसे वो पल भुलाऊं कैसे
ममता में डूबे वो पल भुलाऊं कैसे ..
वह डाट वह सीख भाती थी मुझे
नाराज़गी मां की सताती थी मुझे
वे अनमोल पल भला पाऊँ कैसे
नयनों में बसे वो पल भुलाऊं कैसे
हर लफ़्ज़ याद है कहानी की तरह
हर हिदायत याद ज़ुबानी की तरह
यादों के काँटे भला निकालूं कैसे
नयनों में बसे वो पल भुलाऊं कैसे
मेरी ख़ुशियों में थी ख़ुशियाँ तेरी
राजा बेटा बनायेंगे ख्वाहिशें तेरी
ख़ुशियाँ छोड़ तू चली गयी कैसे
नयनों में बसे वो पल भुलाऊं कैसे
यादों में बसे शब्द निशानी की तरह
गुनगुनाता उसे इक कहानी की तरह
ममता में डूबे पल भला पाऊँ कैसे
नयनों में बसे वो पल भुलाऊँ कैसे
सारे मनोरथ छोड़ क्यों चली गयी
लगता पापा से मिलने पहुँच गयी
नयनों में बसे वो पल भुलाऊं कैसे
ममता में डूबे वो पल भुलाऊं कैसे ॥