चलती जा तू ज़िन्दगी

जैसी भी है तू ऐ ज़िंदगी, चलती जा चलती जा ..

मत फँस दुनियादारी में, सब धरा यहीं रह जाता है

जो बीत गया सो बीत गया, वह पल वापस नहीं आता है

मत रो बीती बातों पर, भविष्य की तू चिंता न कर

वर्तमान में जीना सीख ज़िन्दगी, कर्म पथ पर चलती जा

जैसी भी है तू ऐ ज़िंदगी, चलती जा चलती जा ..

जो आज अपने पल हैं, कल और किसी के होंगे

क्षण भंगुर है यह जीवन, पता नहीं कल कहां होंगे

जीवन की आपाधापी में, शांति का पथ ढूँढती जा

जानना है तुझे ज़िन्दगी, तू अपनी ज़िन्दगी जीती जा

जैसी भी है तू ऐ ज़िंदगी, चलती जा चलती जा ..

खुद हँसना, दूसरों को हँसाना, यही है तेरा धर्म ज़िन्दगी

सच्चाई के पथ पर चलना, यही है तेरा कर्म ज़िन्दगी

सागर जैसा विशाल हृदय रख, दोष रहित, संताप रहित

मन के कलुषित विकारों को, हृदय स्थल से फेंकती जा

जैसी भी है तू ऐ ज़िंदगी, चलती जा चलती जा ..

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