बँट गये वे अपने

वे दिन याद आते हैं २ जब साथ बैठते थे अपने कहाँ गये सब अपने बँट गये स्वार्थ में अपने .मिलने को दौड़ते थे दौड़ कर गले लगते थे अब मिलते हैं तो वे नज़र चुराते हैं कहीं सामना न हो जाए धीरे से कतराते हैं लगता कितना सूना सूना वे नहीं रहे अब अपने … Read more

टूटता विश्वास

टूट जाये विश्वास किसी का जुड़ता नहीं दुबारा मन में खटका बना रहता है कब वो पलटी मारा ॥ विश्वास उपजता है मन में एक दिन की न खेती है नौ माह शिशु गर्भ में रहता है माँ की ममता होती है बचपन जो बीत गया होता है, आता नहीं दुबारा टूट जाये विश्वास किसी … Read more

शुक्रिया ज़िन्दगी

कोई शिकवा नहीं, कोई शिकायत नहीं,ज़िंदगी जैसी भी है, मैं तेरा शुक्रिया कर रहा हूँ. माना कि दुःख है पर सुख भी तो है कैसे कहूँ तू अच्छी नही, तू बहुत खूबसूरत है ज़िंदगी तुझसे बहुत सी आशाएँ हैं उन्हें पूरा करना तू जिन्दगी ज़िंदगी जैसी भी है, मैं तेरा शुक्रिया कर रहा हूँ।हर पल … Read more

भज ले बंदे राम का नाम

जीवन की कब हो जाए शामजप ले बंदे राम का नाम ॥ सुबह हुई कब शाम हुई समय भागता जाता है विषयों में फँसा हुआ इंसान इसी में उलझता जाता है भूल जाता है कहाँ से आया क्या है तेरा कामकुछ समय बंदे अपना निकालो ले लो राम का नाम ॥यह मेरा है यह तेरा … Read more

तुम्हारे बिन

कैसी प्रीति निभायी तूने बीच डगर छोड़ चले गए ॥जीवन साथी बिन जीवन सूना ख़ुशियों के पल सब चले गए, कभी इधर बैठती कभी उधर बैठती कुछ भी न लगता अब नए ।जीवन हो गया संगीत बेसुरा बोल जिसके सूने और बेजान हुए, रंग नहीं शेष अब जीवन में फीके और बदरंग हुए ।सूनी सूनी … Read more

चंचल मन भजन

ये चंचल मन कुछ न समझे, मुझे उलझाए रहता हैएक जगह स्थिर नहीं होता, मुझे दौड़ाए रहता है । सुख में यह उछल रहा है, दुख में बैठकर रोता है यह संसार एक जल का बुलबुला समझ नही आता है अगले क्षण का पता नही वर्षों की योजना बनाता है क्षण भर में सपने ध्वस्त … Read more

हे कान्हा

हे कान्हा ! अब तुम आ जाओ अपना सुदर्शन चक्र चला जाओ ॥ धर्म हो रहा लुप्त प्राय भारत माँ तुम्हें पुकार रही, जो धरा आपने पोषित की थी अक्षुण्णता विखंडित हो रही ।जिस धरती पर तुमने जन्म लियावह अन्तर्वेदना से चीत्कार कर रही, लहूलुहान हो रही आज धरा हे कान्हा ! भारत माँ तुझे … Read more

खींच मच निर्मोही

खींच मत निर्मोही , सुरभित पुष्पों से लदी ये डालटूट जायेगी शाख़ से, पुष्प होंगे उदास ..खिलखिलाती पुष्पित लताएँ,महक रहा घर आँगन नव कलियाँ, अर्ध विकसित, भ्रमरों का आच्छादन, बिखर जायेगें पुष्प धरा पर,,,जब पायेगें न साँसचुन ले हौले से पुष्प माली,, मत कर तू इन्हें उदास ।मधुर, मोहक, पुष्प सारे,,,उमंग में हैं मस्त झूमते … Read more

माँ शबरी

चुन चुन कर फूलों की डगर सजाऊँ, राह निहारूँ, हे राम ! तुम कब आओगे मेरी कुटिया में कह गये गुरु जी मेरे, करना तुम इंतजार शबरीआयेगें एक दिन श्री राम,,,,,तेरी इस कुटिया में, चुन चुन कर फूलों की डगर सजाऊँ, राह निहारूँ, हे राम ! तुम कब आओगे,,गरीब की कुटिया में । अपने गुरु … Read more

मतिभ्रम

रे मानव ! यह मत सोच, तेरे पास बहुत समय है ये केवल तेरा मतिभ्रम है तू तो उस पक्षी जैसा है जो उड़ रहा है गगन की ओरतेरे आगे बहुत से पक्षी गगन का नहीं है कोई छोर, धीरे-धीरे सब लुप्त हो रहे,प्रकृति में सब समा रहेमन में भ्रम क्यों तू पाले हैतू उस … Read more