खींच मत निर्मोही , सुरभित पुष्पों से लदी ये डाल
टूट जायेगी शाख़ से, पुष्प होंगे उदास ..
खिलखिलाती पुष्पित लताएँ,महक रहा घर आँगन
नव कलियाँ, अर्ध विकसित, भ्रमरों का आच्छादन,
बिखर जायेगें पुष्प धरा पर,,,जब पायेगें न साँस
चुन ले हौले से पुष्प माली,, मत कर तू इन्हें उदास ।
मधुर, मोहक, पुष्प सारे,,,उमंग में हैं मस्त झूमते
पुष्पों से लदी डालियाँ, पथिक के मन को मोहते
क्षणिक अस्तित्व ही सही, बना रहे इनका हुलास
तोड़ न झटके से माली, टूट कर हो जायेगे उदास ।
पुष्पों का जीवन ही होता, त्याग और समर्पण का
ख़ुश रहते,ख़ुशियाँ बांटते, संगी होते सुख दुःख का
प्रभु को अर्पित ये होते,,,,ये हैं पावन पुण्य की राश
खिलखिलाने दे इनको माली, ये हो जायेंगें उदास ।
खींच मत ऐ निर्मोही,,,सुरभित पुष्पों से लदी ये डाल
टूट जायेगी शाख़ से, पुष्प होंगे उदास ..