तुम्हारे बिन

कैसी प्रीति निभायी तूने बीच डगर छोड़ चले गए ॥

जीवन साथी बिन जीवन सूना

ख़ुशियों के पल सब चले गए,

कभी इधर बैठती कभी उधर बैठती

कुछ भी न लगता अब नए ।

जीवन हो गया संगीत बेसुरा

बोल जिसके सूने और बेजान हुए,

रंग नहीं शेष अब जीवन में

फीके और बदरंग हुए ।

सूनी सूनी लगती सब गलियाँ

कदम कदम संघर्ष हुए,

हर पल एक दर्द, एक सूनापन,

हर साँस अब आह हुए ।

जीवन तो जीना है

जीवन साथी की याद में जीना है,

सपने संजोए थे जो हम मिलकर

वे सब अब धूमिल हुए ।

निष्ठुर सी लगती ये ज़िंदगी

रोज़ पल पल मरे, रोज पल पल जिए,

अंधियारा बन गया अपना साथी

भाग्य पर कभी हँसे तो कभी रो लिए ।

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