चुन चुन कर फूलों की डगर सजाऊँ, राह निहारूँ,
हे राम ! तुम कब आओगे मेरी कुटिया में
कह गये गुरु जी मेरे, करना तुम इंतजार शबरी
आयेगें एक दिन श्री राम,,,,,तेरी इस कुटिया में,
चुन चुन कर फूलों की डगर सजाऊँ, राह निहारूँ,
हे राम ! तुम कब आओगे,,गरीब की कुटिया में ।
अपने गुरु वर की मानूँ बात, आपकी राह तकूँगी
राह बुहारूंगी, राह सजाऊँगी, कुटिया में ही रहूँगी
अधम जाति की मैं शबरी हूँ दर दर ठुकराई गयी
मन में है विश्वास राम आयेंगे एक दिन कुटिया में ।
चुन चुनकर मैं बेर खिलाऊँगी कंद मूल खिलाऊँगी
चरण कमल कुटिया में पड़ेंगे धन्य भाग हो जाऊँगी
न जानूँ सेवा सत्कार केवल प्रभु दर्शन की है आस
कब खुलेगें मेरे भाग्य आयेंगे राम मेरी कुटिया में !
चुन चुन कर फूलों की डगर सजाऊँ, राह निहारूँ,
हे राम ! तुम कब आओगे मेरी कुटिया में