टूट जाये विश्वास किसी का जुड़ता नहीं दुबारा
मन में खटका बना रहता है कब वो पलटी मारा ॥
विश्वास उपजता है मन में एक दिन की न खेती है
नौ माह शिशु गर्भ में रहता है माँ की ममता होती है
बचपन जो बीत गया होता है, आता नहीं दुबारा
टूट जाये विश्वास किसी का, जुड़ता नहीं दुबारा ॥
टूटे विश्वास के टुकड़े, दिल में सदा जीवित रहते हैं
चाहे कितनी कोशिश करो दिल से नहीं निकलते हैं
न तोड़ो विश्वास किसी का विश्वास है एक सहारा
टूट जाये विश्वास किसी का, जुड़ता नहीं दुबारा ॥
विश्वास की इस दुनिया में, बचकर चलना होता है
पग पग पर बोये काँटे हैं फूंककर निकलना होता है
विश्वास की डोरी नाजुक है यह जुड़ती नहीं दुबारा
टूट जाये विश्वास किसी का, जुड़ता नहीं दुबारा ॥
कर्ण द्रुयोधन की दोस्ती एक पाठ हमें सिखाती है
नहीं छोड़ना साथ मित्र का मृत्यु सिर पर नाचती है
दिया गया वचन मित्र को मित्र को है एक सहारा
टूट जाये विश्वास किसी का, जुड़ता नहीं दुबारा ॥