भज ले बंदे राम का नाम

जीवन की कब हो जाए शाम

जप ले बंदे राम का नाम ॥

सुबह हुई कब शाम हुई

समय भागता जाता है

विषयों में फँसा हुआ इंसान

इसी में उलझता जाता है

भूल जाता है कहाँ से आया

क्या है तेरा काम

कुछ समय बंदे अपना निकालो

ले लो राम का नाम ॥

यह मेरा है यह तेरा है

दिन रात इसी की गणना करता है

स्वार्थ में फँसा हुआ इंसान

अपनों से ही झगड़ा करता है

पाप पुण्य कुछ नहीं देखता

सही ग़लत करता सब काम

अन्तिम समय जब आता है

तब याद आता राम का नाम ।

मानव तन पाया व्यर्थ गँवाया

मृगतृष्णा में भाग रहा,

देर न कर अभी समय है

चेत जा तू हरि कीर्तन कर ले

मोह जनित यह सृष्टि है,

छूटे न बिन भजे राम का नाम

जीवन की कब हो जाए शाम,

जप ले बंदे राम का नाम !!

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.