मतिभ्रम

रे मानव ! यह मत सोच, तेरे पास बहुत समय है

ये केवल तेरा मतिभ्रम है

तू तो उस पक्षी जैसा है

जो उड़ रहा है गगन की ओर

तेरे आगे बहुत से पक्षी

गगन का नहीं है कोई छोर,

धीरे-धीरे सब लुप्त हो रहे,

प्रकृति में सब समा रहे

मन में भ्रम क्यों तू पाले है

तू उस पंक्ति में पीछे है ।

यह भ्रम मत पाल

तू पंक्ति के क्रम में पीछे है,

आगे वाला पीछे हो जायेगा

तू आगे चला जायेगा

मतिभ्रम में मत रह,

तेरे पास अभी बहुत समय है

तेरा क्रम काफ़ी पीछे है,

तू पंक्ति में सबसे पीछे है ।

मान स्वयं को तू सबसे आगे है

आगे ही तेरा क्रम है,

जो भी पल है तेरे पास

इसको बंदे खुलकर तू जी ले,

रे मानव ! यह मत सोच

तेरे पास बहुत समय है,

ये तो तेरा मतिभ्रम है,

ये केवल तेरा मति भ्रम है ।

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