ग्राहक कैसे फँसे एक व्यंग्य

कस्टमर केयर का जमाना है कस्टमर है आज का भगवान नीचे के भगवान कैसे खुश रहेंगे यही ट्रिक चलाना है ।कोई ऊपर के भगवान तो है नही जो अन्तर्मन की बात जानते हैं, ये तो जाल में फँसने वाला भगवान हैलालच में फँस ही जाता है । ग्राहक को तौलिए, मूड को भाँपिए, मुस्कराहट फेंकिये, … Read more

ज़िन्दगी मुस्कुरा कर गुज़ार ले

रे मन ! जिन्दगी जितनी भी है मुस्कुरा कर गुजार ले जिन्दगी जितनी भी है मुस्कुरा कर गुजार ले जीवन अनमोल है संग मिलकर गुज़ार ले भलाई कर बुराई को मन से निकाल दे जिन्दगी जितनी भी है मुस्कुरा कर गुजार ले । यहाँ आया था अकेले जायेगा भी अकेलेअच्छाई या बुराई यही साथ जायेगीभलाई … Read more

ढलती शाम गीत

मैं ढलती सी शाम अंधेरों से डरती हूँ, कभी मिले फुर्सत के पल बेटा, आ जाना मिलने को ॥मेरा बुढ़ापा अकेलापन मुझे डराता है मैं मरने से नहीं डरती यह तो शाश्वत सत्य हैकोई अमर पद पाकर इस दुनिया में कहां आता है मुझे चाहिए तेरा साथ अंधकार से डरती हूँ कभी मिले फुर्सत के … Read more

ये दुनिया चलती रहेगी

ये दुनिया चलती रहेगी किसी के जाने से नहीं रुकी ये दुनिया ये दुनिया चलती रहेगी, कोई आज गया कोई कल जायेगा कौन यहाँ पर रुक पाया है यह दुनिया कल थी, आज भी है आगे भी यूँ ही चलती रहेगी । ये दुनिया चलती रहेगी ..मत उलझो व्यर्थ की उलझनों में न चिंता करो … Read more

मनके की गणना

माला के मनके कहते हैं ऐ मन ! तू मुझ पर टिक जा ! बुद्धि गिनती है मनके, कहती नहीं नहीं एक सौ आठ पर जाकर रुक जा माला के मनके यही चाहते, उन पर मन टिक जाए फ़ितरत मन की ऐसी,, एक जगह न टिक पाए मन कहता क्यों रुकूँ,, चंचल स्वभाव है मेरा … Read more

धन घाम धरा यहीं रह जायेगा

धन दौलत किसके पास रहा है किसके पास रहेगापानी का तो काम है बहना,,, यह हर हाल बहेगा ..संतोष कर जो कुछ पाया लालच होती बुरी बला हैलालच मत कर लोभ छोड़ जीवन जीना एक कला हैसंचित करना है तो पुण्य कमाओ यही साथ चलेगाप्रभु को भज ले बंदे सत्कर्म कर जीवन उद्धार करेगा ।जो … Read more

भजो रे मन भजन

भजो रे मन एक ही है आधार !जीवन डोर बँधी प्रभु तुमसे तुम ही हो करतार, भजो रे मन एक ही है आधार !साँस साँस पर अधिकार है तेरा तू ही हैं खेवनहार, भजो रे मन एक ही है आधार !मृगतृष्णा में भाग रहा मन सब हैं ये बेकार, भजो रे मन एक ही है … Read more

मेरी प्यारी चिड़िया

ऐ चिड़िया ! ऐ चिड़िया ! ऐ मेरी प्यारी चिड़िया इधर उड़ी उधर उड़ी फुदक रही मेरी चिड़िया ..डाल पर बैठी मेरी चिड़िया मुझको तकती रहती है मैं इसे निहारा करता हूँ वह मुझे निहारा करती हैचीं चीं चीं चीं है करती प्रेम प्रदर्शित करती मेरी चिड़िया छोटी सी चुनमुन सी ये दिखती है मेरी … Read more

मन का अन्तर्द्वन्द्व

मन मशगूल हैं चल रहा भीतर ही भीतर अन्तर्द्वन्द्व, आखिर क्या है जीवन का उद्देश्य?केवल वस्त्र, भोजन या आवास, या हवाई यात्रा, मौज मस्ती सब कुछ तो अस्थायी है केवल दिखावा है , छिन जाता है एक दिन,जीवन भर की पूंजी अस्पताल में चली जाती है पर फिर भी हाथ कुछ नहीं आता जरूरत ही … Read more

माँ शारदे वंदना

नमो भगवती माँ सरस्वती, ज्ञान का उपहार दे । आवाहन कर रहा आपका, आ विराजो माँ पटल पर ! २ सुन विनती हे भारती !! कर तू वीणा का झंकार कलुष भाव हृदय से मिटे ,, शुद्ध होये विचार, ब्रह्म विचार की परम तत्व, हृदय में अनूठे भाव देआवाहन कर रहा आपका, आ विराजो माँ … Read more