नया दौर

कहाँ गये पुराने गीत सुहाने, सोलहवें सावन के वे गाने

गुजरी फ़िल्मी ये बातें हैं, चलो चलें अब नये जमाने

नयी उपज की नयी सोच है, आधुनिक शिक्षा का प्रतिफल है

जीवन जीना स्वच्छंद रूप से, दख़लंदाज़ी नहीं पसंद है ।

तीस से पहले शादी नहीं होती, ना नुकुर उस पर भी होती

माँ बाप की मर्ज़ी न चलती, शर्तें पहले से तय होती ।

अनुबंधित शर्तों पर रिश्ता होता है, पालन करना होता है

टूट रहे हैं ऐसे बेमानी रिश्ते, बाद में पछतावा होता है ।

बच्चे होते केवल एक, उस पर भी नखरे अनेक

पति पत्नी दोनों काम बाँटते, रखते इक दूजे से टेक ।

माँ बाप मजबूर हुए हैं, सपने उनके चूर चूर हुए हैं

कर कुछ नहीं सकते हैं, कान हैं पर बधिर हुए है ।

जन्म जन्म का साथ साथियां, हुई पुरानी बात साथियां

नयी सोच का नया दौर है, जब तक पटे साथ साथियां ।

कहाँ गये पुराने गीत सुहाने ..

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