कविता लिखना कला ✍️
विचारों की श्रृंखला जब मन में खिलखिलाती है
सृजन होते हैं सुन्दर भाव, तब कविता बनती है ..
कुम्हार की तरह मिट्टी चुनता है कवि,
कूटता है, पीसता है, छानता है
क्रमवार बार बार करता है, साँचे में ढालता है
तब एक सुन्दर कविता बनती है ..
विचार आते हैं, जाते हैं, लुप्त हो जाते हैं,
इन्हें शब्दों में पिरोने की कला है कविता,
शब्द शब्द में प्राण फूंकने की कला है कविता
तब भावनाओं की सरिता अपने आप बहती है ..
अर्थहीन रचना नहीं है कविता की पहचान,
भावहीन शब्दों से कविता नहीं बनती
सुंदर शब्दावली से कविता सजती है,
अर्थपूर्ण विचारों से कविता जीवंत होती है।
विचारों की श्रृंखला जब मन में खिलखिलाती है
सृजन होते हैं सुन्दर भाव, तब कविता बनती है ..