कवि चला गाँव की ओर अवधी

कवि बहुत रहे हो शहरन मा,चलऽ अब गाँव कइ ओर।सुघ्घर हवा, मीठ जल पावऽ,सुख मिलइ हर इक ठौर॥कटि गवा गन्ना खेतन मा,ट्रैक्टर ऊपर लदाय।फैक्ट्री कइ राहे चलि दीन्ह,मीठे सपना सजाय॥गेहूँ हँसइ हरियर-हरियर,बाली आवइ तैयार।सरसों ओढ़े पीयर चुनरिया,खेतन लागे त्यौहार॥अरहर बोले हमहूँ हईं,पीछे काहे रह जाय।दानन भरी बाली लहराय,गाँव कइ शान बढ़ाय॥मटर बोले ठहर जरा,अबहीं बचपन … Read more

ये प्रयागराज है

है पावन संगम की धरती,ये प्रयागराज है।आस्था, श्रद्धा, संस्कारों की बेनी ये प्रयागराज है॥ 2 गंगा–यमुना–सरस्वती,आकर यहीं समाएँ,अमृत-सा पावन जल लेकर,सबको जीवन पिलाएँ।दूर–दूर से आते भक्त,डुबकी लगा तर जाएँ,साँझ आरती की ज्योति में,माँ गंगा मुसकाएँ।श्रद्धा, प्रेम, विश्वास का,यह अनुपम अंदाज़ हैहै पावन संगम की धरती,ये प्रयागराज है॥ऋषि–मुनियों की तपोभूमि,ज्ञान की ज्योति जले,भारद्वाज आश्रम पावन,इतिहास यहाँ … Read more

गांव की रात गांव की भोर लोकगीत

गाँव की रात बड़ी प्यारी ओ रामा ×2गाँव की भोर बड़ी न्यारी ओ रामा ×2मिट्टी की खुशबू, मन में सुकून,यही धरती जग से प्यारीगाँव की रात बड़ी प्यारीगाँव की भोर बड़ी न्यारी ओ रामा ×2पूर्णिमा की चाँदनी छाई,मेले सजे तमाम,दूर कहीं नौटंकी बाजेहीर-किस्सों की शाम, झूम नचनिया ताल मिलाये वाह वाह हुंकारी, गाँव की रात … Read more

लोकगीत गांव की रात गांव की भोर

लोकगीत · “गाँव की रात, गाँव की भोर” ✍️गाँव की रात बड़ी प्यारी ओ रामा ×2गाँव की भोर बड़ी न्यारी ओ रामा ×2मिट्टी की खुशबू, मन में सुकून,यही धरती जग से प्यारीगाँव की रात बड़ी प्यारीगाँव की भोर बड़ी न्यारी ओ रामा ×2पूर्णिमा की चाँदनी छाई,मेले सजे तमाम,दूर कहीं नौटंकी बाजेहीर-किस्सों की शाम, झूम नचनिया … Read more

चलो लौट चलें बचपन की गलियों में

चलो लौट चलें, बचपन की गलियों में,जहाँ हर मोड़ पे खुशबू थी प्यारी।जहाँ मिट्टी भी गीत सुनाती थी,हर साँस थी जैसे त्योहार की तैयारी।चलो लौट चलें बचपन की गलियों में।जहाँ मन न थकता, न रुकता था,जहाँ हर सपना सच लगता था।जहाँ दोस्ती थी चाँद सी निर्मल,जहाँ झगड़े भी पल में मिटता था।सुनहरी धूप में साइकिल … Read more

बूढ़ा बरगद

मैं एक बूढ़ा बरगद हूँ, देखो मेरी शाखाएँ,मेरे पत्ते हैं मेरे प्राण, मेरी जड़ें ही हैं मेरा आधार । बूढ़ा हूँ पर खुश हूँ, हरियाली में खो जाता,धरती से जड़ें चूमतीं, मन मेरा मुस्काता।अब बूढ़ा हूँ, विराम चाहिए,नये बरगद के लिए जगह बनाऊँ।जाऊँगा मैं, फिर आऊँगा,छोटा सा नया वृक्ष बनकर।नये पत्तों, नयी जड़ों के संग,फिर … Read more

चलता फिरता राही

मैं तो एक चलता फिरता राही हूँ,कभी इधर चला, कभी उधर चला,जीवन की राहों पर चलते हुए,नई दिशाओं की ओर बढ़ता चला।जीवन की इस यात्रा में,कभी सुख है, कभी गम है,पर मैं तो चलता रहता हूँ,गम के धुएँ हवा में उड़ाता चला ।सपनों की उड़ान में खो जाता हूँ,नई उम्मीदों के साथ बढ़ता चलाचलता रहता … Read more

मेरी साइकिल

चल चल मेरी साइकिलखुर्र खुर्र खुर्रतू तो रही मेरे बचपन की साथी तय करती मंजिलें फुर्र फुर्र फुर्र ।सरपट दौड़ती रहती थी टेढ़ी मेढ़ी पगडंडियों पर तेरे भरोसे चल देता था कोसो मंजिल तय करता था, न तू थकती थी न मैं थकता था कैसा सुन्दर ये गठबंधन था । पैडल पर पैडल मारता था … Read more

यादें हैं यादों का क्या भाग नौ

चलो लौट चलें, बचपन की गलियों में,जहाँ हँसी बस हँसी थी।जहाँ मन कभी नहीं थकता,और समय भी रुकता था॥गली में दौड़ते थे हम दोस्त,हँसी और शोर का था मेल।छुपा-छुपी, किले बनाना,मन की यही थी सबसे खेल॥सुनहरी धूप में हाथ पकड़े,साइकिल पर दौड़ते हम।सड़क किनारे जंगली फूल,उनकी खुशबू अब भी याद है मुझको॥खट्टे-मीठे आम, जलेबी की … Read more

चलो चलें हम गांव की ओर

इस शहर की आपाधापी से चल निकल चलें हम गांव की ओर । पड़ोसी भी नहीं पूछता भाई तुम कैसे हो, मशीनरी जीवन हम जीते हैं देर रात थक कर घर आते हो ।सुकून की दो रोटी दुर्लभ बच्चे भी मिलने के पहले सो जाते हैं चलो चलें हम गांव की ओर जहाँ बचपन में … Read more