मेरी दिनचर्या

सूर्योदय की पहली किरणों से मेरा दिन शुरू हो जाए प्रकृति की हरियाली में,मेरा मन खुशियों से भर जाएवृक्षों की छाँव में बैठना, नदी की धारा को देखनाफूलों की सुगंध में खो जाऊं, पक्षियों की चहचहाहट सुनूँ बच्चों के साथ खेलना, उनकी मासूमियत में ख़ुशियाँ ढूँढना रात को तारों की चमक में,मेरा मन खुशियों से … Read more

मत सोचो क्या होगा

मत सोचो तुम नहीं रहोगे,तो आखिर क्या होगा, क्या सूनापन होगा?मन उदास यही सोचकर,मैं नहीं रहूँगा तो कैसा होगा? क्या कभी तुमने ये सोचा है,तेरे पूर्वजों ने भी यही सोचा होगा, यही दर्द सहा होगा?सोचे जरा क्या रुका है जीवन,संसार यूँ ही चलता होगा, निरंतर गति में होगा।तुम तो नहीं संसार के नियंता,मालिक तो कहीं … Read more

बचपन के वे दिन

जो बीत गये सो बीत गये वो दिन वापस नहीं आते पर बचपन के वो दिन सुहाने याद बहुत आते …बचपन के दिन, सुहानी स्मृतियाँ,बीत गये सो बीत गये, वो दिन वापस नहीं आतेउठते भोर, योजना बनाते दोस्तों संग,खेलते खूब, सुन्दर थी वो अनमोल पल की बातें .. न करते चिंता, क्या खायेंगे, क्या पहनेंगे,खूब … Read more

चल ज़िन्दगी कहीं और चलें

ठहरने का नाम नहीं है जिंदगी,चल जिंदगी कहीं और चले, हर पल नई राहें.. ठहरने का नाम नहीं है जिंदगी,चल जिंदगी कहीं और चले, हर पल नई राहेंहर मोड़ पर बदलती है दिशा,नये अनुभवों की ओर चले, नई उड़ान।जिस सरिता में बहाव नहीं होता,उसका जल निर्मल नहीं होता, सूख जाता हैबहाव की नाम ही है … Read more

अभी समय है जाग जा हे मानव

अभी समय है जाग जा, हे मानव!प्रभु की भक्ति कर ले।सोचो ज़रा सोचो!हक़ीक़त को समझो!अर्थी पर पड़े हुए हो,शव पर कफ़न बाँधा जा रहा है!ढीली गरदन कहीं लटक न जाये उसे सँभाला जा रहा है।पैर कहीं अकड़ न जाये रस्सियों से बाँधा जा रहा है।कोई खींच रहा है इधर से,कोई खींच रहा है उधर से।मार … Read more

भिक्षुक

“ भिक्षुक”नाम तो अटपटा सा है देखने में ऐसा ही लगता है पर मेरे विचार से जिसने इस गूढ़ शब्द का अर्थ भलीभाँति समझ लिया उसने परमात्म को जान लिया ..इस मिथ्या संसार में हम सभी भिक्षुक ही तो हैं बिना भिक्षुक बने कोई ज्ञानी नही होता ज्ञानी हुए बिना कोई संन्यासी नहीं होता ..यह … Read more

पाश्चात्य जीवन

यहाँ देखता हूँ तो पाता हूँ लोग एकाकी जीवन ज़्यादा जी रहे हैं शौक से कम हैं लगता है मजबूरियाँ ज़्यादा हैं संयुक्त परिवार का चलन नही वृद्ध स्वयं अपना भार उठाते हैं बच्चे बालिग़ होते हैं घर से बाहर कर दिये जाते हैं हाँ समय काटते हैं कुत्तों के साथ, बिल्लियों के साथ ..दोस्तों … Read more

दहेज एक अभिशाप

बेटी ! क्या दूँ तुझे भेंटलोभियों का नहीं भरता कभी पेट तू तो उसी माँ की बेटी है जो दहेज की बलि चढ़ी थी याद हैं मुझे सब बातें ज्यों की त्यों,,,,पति ने गला घोटकर जला दिया कह दिया रसोई में जल गयी पर तू तो ज़िंदा रह गयीतू ही बता बेटी – क्या दूँ … Read more

हे राम ज़रा बताओ

हे राम ! जरा तुम ही बताओ,तेरी राम खड़ाऊँ कहाँ गईइस कलि काल में रिश्तों की अहमियत विलुप्त हुई ..कर रहे छल कपट आपस में, छीना झपटी में लगे हुए छल प्रपंच में सब पड़े हुए, प्रभु चरण पादुका कौन छुए । भरत ने राज सिंहासन हड़पा, तनिक लाज उन्हें न आई कैकेयी खड़ी अट्टहास … Read more

राम वाल्मीकि संवाद

बोले राम- हे श्रृषिवर ! सुरम्य स्थल कोई बताओकहाँ पर ठाँव बनाऊँ मैंकण कण में निवास आपका,सर्वत्र आपको पाऊँ मैं बोले वाल्मीकि – हे प्रभु ! कहाँ पर ठाँव दिखाऊँ मैं भला कौन सा है ऐसा स्थल,,,जहां आप नहीं रहते हैं आप तो त्रिकालदर्शी हैं, करतल पर जग को रखते हैं आप साक्षात जगदीश्वर हैं, … Read more