अभी समय है जाग जा हे मानव

अभी समय है जाग जा, हे मानव!

प्रभु की भक्ति कर ले।

सोचो ज़रा सोचो!

हक़ीक़त को समझो!

अर्थी पर पड़े हुए हो,

शव पर कफ़न बाँधा जा रहा है!

ढीली गरदन कहीं लटक न जाये

उसे सँभाला जा रहा है।

पैर कहीं अकड़ न जाये

रस्सियों से बाँधा जा रहा है।

कोई खींच रहा है इधर से,

कोई खींच रहा है उधर से।

मार गाँठ ज़रा तगड़े से

शव कहीं रास्ते में गिर न जाये!

अभी समय है जाग जा, हे मानव!

प्रभु की भक्ति कर ले।

यह गांठ कब तक रहेगी?

रस्सियाँ भी कब तक रहेंगी?

जब सब कुछ जलना ही है,

सब ख़ाक ही होना है

तो गिरे पड़े क्या फ़र्क़ पड़ता है?

जो कुछ संग्रह था साथ में,

जिसके बल पर अकड़न थी,

एक झटके में छूट गया!

न रहा आयकर प्रमाण पत्र,

न बचा कोई ऊँचा ओहदा

हाँ, शेष रहा

केवल अलविदा! अलविदा!

अभी समय है जाग जा, हे मानव!

प्रभु की भक्ति कर ले।

जो निभाने आये हैं

नहीं सोचते, उनकी भी यही हालत होगी!

दूसरों की शवयात्राओं में

जाने का नाटक करते हो,

यहाँ तो ईमानदारी दिखलाया करो!

देश जा विदेश जा

धरती पर रह या चाँद पर जा

पर समझ ले

आखिर में श्मशान में ही जाना है!

तू भाग कर कहाँ जायेगा?

अभी समय है जाग जा, हे मानव!

प्रभु की भक्ति कर ले।

जो भी समय है तेरे पास,

क्षण-क्षण हर पल

कर प्रभु की अरदास।

मृत्यु की ओर बढ़ रहा तू मानव

संसार में बेहोश मत हो जा!

हाय रे तेरी कल्पनाएँ!

हाय रे तेरी नश्वरता!

हाय रे मनुष्य तेरी वासनाएँ!

धिक्कार है इस नश्वर जीवन को।

अभी समय है जाग जा, हे मानव

प्रभु की भक्ति कर ले। 🙏

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