जो बीत गये सो बीत गये वो दिन वापस नहीं आते
पर बचपन के वो दिन सुहाने याद बहुत आते ...
बचपन के दिन, सुहानी स्मृतियाँ,
बीत गये सो बीत गये, वो दिन वापस नहीं आते
उठते भोर, योजना बनाते दोस्तों संग,
खेलते खूब, सुन्दर थी वो अनमोल पल की बातें ..
न करते चिंता, क्या खायेंगे, क्या पहनेंगे,
खूब घूमते, गाँव की टोली संग, खेलते,
बचपन के वे यार, हृदय में बसते हैं,
सीमित साधन, सीमित चाहत, पर खूब मस्ती करते ..
संयुक्त परिवार, मिलकर हम रहते
कमी नहीं खलती, कोई चीज की नहीं
आज एक नहीं, दस चीजें हैं,
पर कमी कमी सी लगती, सब कम दिखते ..
स्वजन मेरे सब याद आते हैं,
बचपन के वो दिन, सुहाने स्मृतियाँ
बीत गये सो बीत गये, वो दिन वापस नहीं आते,
पर बचपन के वो दिन हृदय में बसते ..
जो बीत गये सो बीत गये वो दिन वापस नहीं आते
पर बचपन के वो दिन सुहाने याद बहुत आते हैं.