मत सोचो क्या होगा

मत सोचो तुम नहीं रहोगे,

तो आखिर क्या होगा, क्या सूनापन होगा?

मन उदास यही सोचकर,

मैं नहीं रहूँगा तो कैसा होगा?

क्या कभी तुमने ये सोचा है,

तेरे पूर्वजों ने भी यही सोचा होगा, यही दर्द सहा होगा?

सोचे जरा क्या रुका है जीवन,

संसार यूँ ही चलता होगा, निरंतर गति में होगा।

तुम तो नहीं संसार के नियंता,

मालिक तो कहीं अलग बैठा है, सर्वशक्तिमान है।

तुम तो मात्र एक कठपुतली,

जैसा वह चाहे नृत्य करना होगा, जीवन की लीला में होगा।

जो जैसा चलता है चलने दो,

उसे छोड़ो सब कुछ प्रभु की मर्ज़ी पर, उसकी इच्छा में होगा।

मत सोचो तुम नहीं रहोगे,

तो आखिर क्या होगा, क्या सूनापन होगा?

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