ग्राहक कैसे फँसे एक व्यंग्य

कस्टमर केयर का जमाना है

कस्टमर है आज का भगवान

नीचे के भगवान कैसे खुश रहेंगे

यही ट्रिक चलाना है ।

कोई ऊपर के भगवान तो है नही

जो अन्तर्मन की बात जानते हैं,

ये तो जाल में फँसने वाला भगवान है

लालच में फँस ही जाता है ।

ग्राहक को तौलिए, मूड को भाँपिए,

मुस्कराहट फेंकिये,

फँस गया तो फँस गया

नहीं तो क्या गया ?

काउंटर पर ख़ूबसूरत महिला बैठी है

ग्राहक को देख कर हौले से मुस्करा देती है

भले ही उसकी ड्यूटी है

ग्राहक के लिए तो संजीवनी बूटी है ।

पैसों की मुस्कुराहट है

हँसना पड़ता है, हँस दिए,

इसी मुस्कुराहट में

न जाने कितने ग्राहक फँस गए ।

ग्राहक होता है भगवान

उसका न करो अपमान ?

कुछ भी बकता है सुनते रहो

कहते रहो इक्सक्यूज मी

वेरी सारी सर

यह तुम्हारे धैर्य की परीक्षा है

यह तुम्हारी सर्विस की यही गारंटी है ।

ग्राहक अगर खुश हो जाता है

ख़ुश होकर झोली भर जाता है

बदले में केवल .हौले से

“”एक मुस्कराहट पाता है “””

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