रे मन ! जिन्दगी जितनी भी है मुस्कुरा कर गुजार ले
जिन्दगी जितनी भी है मुस्कुरा कर गुजार ले
जीवन अनमोल है संग मिलकर गुज़ार ले
भलाई कर बुराई को मन से निकाल दे
जिन्दगी जितनी भी है मुस्कुरा कर गुजार ले ।
यहाँ आया था अकेले जायेगा भी अकेले
अच्छाई या बुराई यही साथ जायेगी
भलाई कर बुराई को मन से निकाल दे
जिन्दगी जितनी भी है मुस्कुरा कर गुजार ले ।
लोभ, झूठ,फरेब, धन-संपति,
घमंड यही सब रह जायेगा,
क्या लाये थे और क्या खोने का गम
जी ले ये जिन्दगी मुस्कुरा कर गुजार ले !
कुछ वक्त अपनों के संग गुजार ले
जी ले भरपूर, हर पल ख़ुशियों का,
सुबह सुबह उठ कर राम नाम पुकार ले
रे मन ! जिन्दगी जितनी भी है मुस्कुरा कर गुजार ले ।