आधुनिक ज्ञानी हास्य

व्हाट्सएप पढ़कर ज्ञानी बने,गूगल से ही ग्रंथ रचे,ना वेद पढ़े, ना शास्त्र पढ़े हर विषय पर भाषण ठचे।अधूरी बातों का शोर मचाया,सत्य को अफ़वाह में मिलाया,शीर्षक देखा, अर्थ न जाना,फिर भी खुद को ज्ञानी कहलाया ।जो समझाए, उसे मूर्ख ठहराएँ,खुद की भूल कभी न मानें,प्रश्न उठे तो क्रोध दिखाएँ,तर्क नहीं, बस शब्द चलाएँ।दाढ़ी, कुर्ता, मुख … Read more

सम्मान की होड़ हास्य

कभी सम्मान तप से मिलता था,साधना, त्याग और श्रम से।आज सम्मान की बोली लगती है,पोस्टर, पैसे और छल से।जहाँ शब्द कम, बैनर भारी,जहाँ विचार नहीं, सिफ़ारिश प्यारी।जिसने छपवा ली मोटी पुस्तक,चाहे भीतर हो रिक्तता सारी।मंच सजा है फूलों से,माइक गूँजता लच्छेदार भाषणों से।सम्मान सूची लंबी इतनी,बैठे इंतज़ार करते घंटों से।कवि बैठा है अंतिम पंक्ति में,जिसने … Read more

वोट मांग नेता गली गली हास्य

चुनाव में गाँव में आए नेता जी,नंगे पाँव घूमे गली-गली।कहत पुकारे भैया-भाभी, मामा जी,नाना-नानी, काका जी।कहेंआपका सर पर हाथ चाहिए,बेटा समझ आशीर्वाद चाहिए।वोट मिला तो चाल बदली,गाड़ी बदली, हाल बदले।कल जो थे धरती के बेटे,आज शीशे के भीतर सिमट चले।संगमरमर का महल खड़ा है,दरवाज़े पर पहरा भारी।काम पड़े तो फ़ोन न उठे,भूल गए सब रिश्तेदारी।पाँच … Read more

अंकल कहो आंटी नही

समाज में चलन बड़ा रोचक,महिलाएँ कहें “आंटी नहीं, दीदी कहो सच!”साठ हों या अस्सी, उम्र का पैमाना,‘आंटी’ शब्द सुनते ही बदल जाता निशाना।किट्टी पार्टी में हँसी का दौर,किसी ने कहा “आंटी जी, ज़रा इधर आएँ!”वरिष्ठ महिला फट पड़ी “क्या तुम मेरी बेटी हो जो आंटी कह रही?”सभी सकपका गए, बोले “अरे नहीं, बहनजी!”तब से ग्रुप … Read more

पटल की महफ़िल व्यंग्य पूर्ण गीत

पटल-पटल घूमे कविवर, घर का भूला हाल । शब्दों में जीते सपनों का, खाली पड़ा थाल ॥ मोबाइल बजा, पत्नी ने कहा,छोड़ो अपना पटल । राशन नहीं है घर में, भूखे पेट बच्चे रहे मचल ॥ संगीत बजाओ, सुर उठाओ, व्यंग्य में डूबे जीवन । भूल जाओ घर द्वार अब कविता में ही तुम काटो … Read more

फूफा चरित्र

क्यों ग़ुस्सा करूँ बार बार क्या मैं कोई फूफा हूँ जो बात बात पर तुनक जाये और कहे मैं अब चलता हूँ ।हर बात अपनी मनवाये अपने मन की वो करवाये उनके मन की करो न बातें छोड़ दूर बैठ वो जाये ।सोचता रहता आयेगा कोईकोई मना कर ले जायेगा मान मनौव्वल का फूफा रोगी … Read more

नमस्कार के प्रकार

मित्रों सुबह होने वाली है मन में मेरे विचार आया ,,,जरा देखे कितने प्रकार के शब्दों से हम आपको नमस्कार कर सकते हैं ! तो शुरू होते है, कुछ नाम हम लेते है, कुछ नाम बदले में आप भी ले ले और हम एक सूची क्यों न तैयार कर लें ।प्रेम से बोलो -जय श्री … Read more

जय हो हिंदुस्तान की व्यंग्य

महाराष्ट्र में रहना हो तो मराठी बोलो,बंगाल में रहना हो तो बंगाली बोलो,गुजरात में रहना हो तो गुजराती बोलो,कर्नाटक में रहना हो तो कन्नड़ बोलो।हर राज्य अपनी भाषा बोले,पर जाति–धर्म–भाषा के नाम परक्यों देश को तोड़े?जय हो हिंदुस्तान की।कितनी भाषा, कितनी बोली,न सीखो तो मिलती गोली।मन में संकुचित सोच पाले,नेताओं की जिह्वा पर न पड़ें … Read more

हेल्थकेयर व्यंग्य

ग्राहक अस्पताल में पहुँचता है,पार्किंग में गाड़ी खड़ी करते हीइलाज शुरू हो जाता है।जितनी बड़ी गाड़ी,उतना बड़ा रोग,और उतनी ही बड़ी फ़ीसवैज्ञानिक सिद्धांत है जनाब!अंदर घुसते ही“मे आई हेल्प यू”ऐसी मुस्कान बिखेरता है,जैसे आपकी बीमारी नहीं,आपकी लिमिट देखकर खुश हुआ हो।आजकल बीमारी नहीं,ग्राहक अस्पताल पहुँचता है,नब्ज़ बाद में देखी जाती है,पहले पूछा जाता हैमेडिकल इंश्योरेंस … Read more

मोबाइल मेरी सौतन

अब बहुत हो गया,आज तुम्हें मैं फेंक आऊँगी,निश्चित ही कूड़ेदान में।तू मेरी सौतन हो गई,बहुत मुझे सताती है।कहती हूँ, जब कोई काम उन्हें,तू बीच में कूदकर आती है।हाँ, आज तुझे मैं नहीं छोड़ूँगी,फेंक आऊँगी कूड़ेदान में।जबसे तू मेरे घर आयी,जीवन में मेरे विपदा लायी।तुझमें ही ये चिपके रहते हैं,तुझे साथ-साथ चिपकाये रहते हैं।तू मेरे फ़िल्म … Read more