चल ज़िन्दगी कहीं और चलें

ठहरने का नाम नहीं है जिंदगी,चल जिंदगी कहीं और चले, हर पल नई राहें.. ठहरने का नाम नहीं है जिंदगी,चल जिंदगी कहीं और चले, हर पल नई राहेंहर मोड़ पर बदलती है दिशा,नये अनुभवों की ओर चले, नई उड़ान।जिस सरिता में बहाव नहीं होता,उसका जल निर्मल नहीं होता, सूख जाता हैबहाव की नाम ही है … Read more

जीवन एक पहेली

जीवन एक अजीब पहेली है, समझना इसे आसां नही जो चाहा वह मिलता नहीं, जो मिला रास आता नही जो खोया वह याद आता है जो पाया संभाला जाता नहीं जो सँभाला काम आता नही जो काम आता संजोया जाता नही । जीवन एक अजीब पहेली है, समझना इसे आसान नही जिंदगी जीना आसान होता … Read more

जीवन के पल

जीवन के कुछ पल होते हैं, बहुत याद वे आते हैं खट्टे मीठे जैसे भी हो, वो पल सुनहरे लगते हैं ..मन को कैसे समझाऊँ नहीं समझ में आता है अन्तर्मन की व्याकुलता सब कुछ याद दिलाता है मन ही मन को समझाता पर नहीं समझ में आते हैं । हर पल कुछ खोता है … Read more

चारित्रिक गुण

व्यक्तित्व पहचान है बिन बोले सब कुछ कहता है ऊँची सोच रखने वाला गहरी बात ही करता है ..मेलजोल रखे अच्छे लोगों से अच्छी सीख मिलती है ज्ञान में होती है वृद्धि सोच बड़ी हो जाती हैसंस्कार जिसके अच्छे होते हैं अच्छा कर्म ही करते हैं भला करते हैं दूसरों की बुरा नहीं वे सोचते … Read more

उत्तरार्द्ध

“लगता है उत्तरार्द्ध आ गया”“तन की शक्ति क्षीण हो रही”लगता है उत्तरार्द्ध आ गया,तन की शक्ति क्षीण हो रही।साँस तो चलती है लेकिन,धीमे-धीमे थम सी रही।।घुटनों में अब दर्द ठहरता,नेत्रों का तेज़ गया कहीं।चलते-चलते ठहर सा जाता,थक जाता हूँ यहीं कहीं।।सोचता हूँ बैठ जाऊँ पलभर,फिर डरता यह आदत न बन जाए कहीं।।लगता है उत्तरार्द्ध आ … Read more

कर्म पथ

चलता रहूँ कर्म पथ पर, पग पीछे मेरे न हटेसच्चाई की राह पर, लेखनी मेरी कभी न डिगे ॥ कर्म ही तो धर्म हमारा, गीता ने यही सिखाया है कृष्ण के उपदेश पर ही, अर्जुन ने गांडीव उठाया है अधर्म बोलता है जहाँ प्रभु अवतरित आ होते हैं रच देते हैं महाभारत व्यास आदि कवियों … Read more

विजेता

कौन रहा विजेता सिकन्दर महान??वह भी तो ख़ाली हाथ गया था अपने वतन भी न पहुँचा समय बहाकर ले जाता हैनाम’ और ‘निशान’ कोई ‘हम’ में रह जाता हैऔर कोई ‘अहम’ में सिर्फ दुनिया के सामने जीतने वाला ही विजेता नही होताकिन रिश्तों के सामने कब और कहाँ पर हारना हैयह जानने वाला भी विजेता … Read more

रंगमंच

रंगमंच है यह दुनिया, इसके रंग हज़ारजैसी भी है ज़िन्दगी, जी लो ख़ुशी से यार अपनी अपनी है भूमिका, अपना है किरदार कहीं कमी न रह जाये, खुल कर खेलो यार नेपथ्य में जब हम जाये, लोग याद करें हमको एक सितारा रहा चमकता, छिप गया वह यार । चलते फिरते गले लगायें ,प्रेम से … Read more

मेरी सोच

नीरवता की गहराई में मग्न अकेले रहता हूँ बैठ जाता हूँ झील किनारे प्रकृति को झांकता रहता हूँ.हरे भरे ये वृक्ष सुहाने मेरे मन को भाते हैं खिले हुए ये पुष्प सुगंधित मेरे मन को ललचाते हैं कहाँ से पाया रंग रूप यह सुन्दर इसे सोचता रहता हूँ नीरवता की गहराई में मग्न अकेले रहता … Read more

चलती जा तू ज़िन्दगी

जैसी भी है तू ऐ ज़िंदगी, चलती जा चलती जा ..मत फँस दुनियादारी में, सब धरा यहीं रह जाता है जो बीत गया सो बीत गया, वह पल वापस नहीं आता है मत रो बीती बातों पर, भविष्य की तू चिंता न कर वर्तमान में जीना सीख ज़िन्दगी, कर्म पथ पर चलती जाजैसी भी है … Read more