चारित्रिक गुण

व्यक्तित्व पहचान है

बिन बोले सब कुछ कहता है

ऊँची सोच रखने वाला

गहरी बात ही करता है ..

मेलजोल रखे अच्छे लोगों से

अच्छी सीख मिलती है

ज्ञान में होती है वृद्धि

सोच बड़ी हो जाती है

संस्कार जिसके अच्छे होते हैं

अच्छा कर्म ही करते हैं

भला करते हैं दूसरों की

बुरा नहीं वे सोचते हैं ..

चाहे जितना ऊँचे चढ़ जायें

ध्यान नहीं तो नीचे गिरते हैं

संस्कार हीन व्यक्ति

अधोमुख एक दिन आ गिरते है

जीवन रूपी सीढी

जब यह टेढ़ी हो जाती है

तब पता चलता है

ज़िन्दगी क्या होती है

अच्छा कर्म हो या बुरा कर्म

दोनों का फल निश्चित है

यहीं भुगतना पड़ता हैं

स्वर्ग नर्क कहने की बातें हैं

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