मनके की गणना

माला के मनके कहते हैं ऐ मन ! तू मुझ पर टिक जा ! बुद्धि गिनती है मनके, कहती नहीं नहीं एक सौ आठ पर जाकर रुक जा माला के मनके यही चाहते, उन पर मन टिक जाए फ़ितरत मन की ऐसी,, एक जगह न टिक पाए मन कहता क्यों रुकूँ,, चंचल स्वभाव है मेरा … Read more

धन घाम धरा यहीं रह जायेगा

धन दौलत किसके पास रहा है किसके पास रहेगापानी का तो काम है बहना,,, यह हर हाल बहेगा ..संतोष कर जो कुछ पाया लालच होती बुरी बला हैलालच मत कर लोभ छोड़ जीवन जीना एक कला हैसंचित करना है तो पुण्य कमाओ यही साथ चलेगाप्रभु को भज ले बंदे सत्कर्म कर जीवन उद्धार करेगा ।जो … Read more

मन का अन्तर्द्वन्द्व

मन मशगूल हैं चल रहा भीतर ही भीतर अन्तर्द्वन्द्व, आखिर क्या है जीवन का उद्देश्य?केवल वस्त्र, भोजन या आवास, या हवाई यात्रा, मौज मस्ती सब कुछ तो अस्थायी है केवल दिखावा है , छिन जाता है एक दिन,जीवन भर की पूंजी अस्पताल में चली जाती है पर फिर भी हाथ कुछ नहीं आता जरूरत ही … Read more

तब सुन्दर कविता बनती है

तब एक सुन्दर कविता बनती है .मधुर विचारों की श्रृंखला मन में जब खिलखिलाती हैउमड़ते हैं भाव सुन्दर सुघड़ सलोनी रूप में लेखनी में उतर जाते हैं तब एक सुन्दर कविता बनती है । एक कुम्हार की तरह महीन मिट्टी चुनता है कवि,कूटता है, पीसता है, छानता है, मिट्टी में चमक आ जाती है तब … Read more

ज़िन्दगी एक पुस्तक

ज़िन्दगी एक पुस्तक✍️ज़िन्दगी इक पुस्तक है, तीन पृष्ठ की कहानी हैलिख लो अपने मन की, यही ज़िन्दगानी है ▪️पहला पेज जन्म है, अंतिम पेज मृत्यु हैबीच का पेज खाली है, लिख लो अपने मन की हर पल एक नया अध्याय इक नई कहानी है लिख लो अपने मन की, यही ज़िन्दगानी है । ▪️जीवन एक … Read more

शीर्षक शून्य कविता

जब मन मस्तिष्क में कोई विचार न आये तो क्या करें , क्या कुछ न लिखे ऐसा तो नहीं है कि विचार हड़ताल पर हैं मन मस्तिष्क शून्य है चलो आज कुछ ऊट-पटांग लिखते है बिना किसी शीर्षक के हो सकता है लोग इसे ही पसंद करे ..हाँ तो इस समय मैं पार्क में घूम … Read more

जीवन की पगडंडी

ऐ मेरी प्यारी पगडंडी,मेरे बचपन की पगडंडी,तू है मेरे जीवन की पगडंडी।तेरी राहों में बिखरे हैं फूल,तेरी धूलि में नन्हे पाँव के निशान।तेरे किनारों पर हँसते हैं झुरमुट फूल,तेरे पथ पर गूँजती है चहकती नदियाँ।तेरी छाँव में खेला मैंने बचपन,तेरी कुहासों में खोए सपने।ऊबड़–खाबड़, टेढ़ी–मेढ़ी,जैसी भी हो, तू हमेशा प्यारी लगी।छोड़ देता हूँ पक्की सड़कें,जो … Read more

दांत का तिनका दोहे

तिनका छोटा ही सही, घाव करे गंभीर ।दाँतों में ऐसा फँसा,चुभता जैसे तीर ॥ देखन में छोटन लगे,छीने मुख की चैन ।दंत छिद्र में आ फँसा, करता है बेचैन ॥स्थायी घर बना लिया, दंत छिद्रों के बीच ।नीम की सींके अब कहाँ, कैसे निकले नीच ॥लघु किसी को न मानिए, सबका अपना क्षेत्र |तिनके को … Read more

मेरी दिनचर्या

सूर्योदय की पहली किरणों से मेरा दिन शुरू हो जाए प्रकृति की हरियाली में,मेरा मन खुशियों से भर जाएवृक्षों की छाँव में बैठना, नदी की धारा को देखनाफूलों की सुगंध में खो जाऊं, पक्षियों की चहचहाहट सुनूँ बच्चों के साथ खेलना, उनकी मासूमियत में ख़ुशियाँ ढूँढना रात को तारों की चमक में,मेरा मन खुशियों से … Read more

मत सोचो क्या होगा

मत सोचो तुम नहीं रहोगे,तो आखिर क्या होगा, क्या सूनापन होगा?मन उदास यही सोचकर,मैं नहीं रहूँगा तो कैसा होगा? क्या कभी तुमने ये सोचा है,तेरे पूर्वजों ने भी यही सोचा होगा, यही दर्द सहा होगा?सोचे जरा क्या रुका है जीवन,संसार यूँ ही चलता होगा, निरंतर गति में होगा।तुम तो नहीं संसार के नियंता,मालिक तो कहीं … Read more