जीवन का यथार्थ

जीव तो पराधीन होता है, ईश्वर के समान स्वतंत्र नही, काल चक्र के पहिये में एक दिन विलुप्त हो जाता है ।समस्त संग्रहों का अंत विनाश है, लौकिक उन्नतियों का अंत भी है पतन, वृक्ष के पके हुये फल का पतन ही तो अंततः होता है । संयोग का अंत वियोग है,जीवन का अंत मरण … Read more

वक्त

सब वक़्त एक समान नहीं होता यह तो बदलता रहता है, आप कैसे हैं, आप कौन हैं?तीन शब्दों में रिश्ता चलता रहता है ।समय पर जो साथ देता है उसे रिश्ते कहते हैं, जो दुख में साथ निभाता है उसे फ़रिश्ते कहते हैं ।समय जब अनुकूल होता है,दुनिया भी साथ देती है, समय जब प्रतिकूल … Read more

मन मेरे चल उड़ चले

मन मेरे चल उड़ चले दूर बहुत दूर स्वजनों से मिले बिछुड़ो से मिले गले हम मिले जो गये दूर बहुत दूर मन मेरे कहाँ तक उड़े कहाँ पर चले कुछ भी न पता सब कहाँ को गये अब तू ही बता सब कहाँ को गये? हम वहीं पर चले मन मेरे .मेरे हृदय की … Read more

ख़ाली हाथ

ख़ाली हाथ ✍️✍️कौन कहता है खाली हाथ आये थेऔर खाली हाथ जायेंगे?हमने जो पूर्वजन्म में कर्म किये थे वह कर्मफल लेकर आये थे और इस जन्म के कर्मों को साथ लेकर जाएंगे,पर कोई न देख पाया था और न आगे देख पायेगा केवल ख़ाली हाथ नज़र आयेगा।जीवन मृत्यु के इस चक्र में हमारे कर्म ही … Read more

एकांत और अकेलापन

मन में एक जिज्ञासा आयी है,दो समानार्थी शब्दों की चर्चा करते हैं,दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं,पर आकाश पाताल का अंतर है । स्वभाव से दोनो उल्टे होते हैं,पर भाई भाई जैसे लगते हैं,एक को “एकांत” हम पुकारते हैं,दूसरे को “अकेलापन “ बोला जाता है ।अकेलापन की पहले बात करे,यह एक दुखी आत्मा होती … Read more

जीवन की यात्रा बहुत छोटी है

कोई आपसे करे शरारत चुपचाप सहन कर लेना सब,न बने असभ्य, न करे लड़ाई,जीवन की यात्रा बहुत छोटी है । मन में सदा यह गाँठ बाँध लें, निर्थक बातों पर चर्चा नहीं करना है,शांत रहे, तनाव ग्रस्त न रहे आप,जीवन की यात्रा बहुत छोटी है । कोई आपको करे अपमानित नज़र अंदाज करें, न विवाद … Read more

रोचक बाते

प्रेम प्रदर्शित वहीं करे जो समझे मन के भावजलों वहीं जहां पडे ज़रूरत उजालो में दीपक का नही ठांव । हक़ीकत की भीड़ में गुमशुदा सपने ढूँढ रहे हैं आजकल हम अपनो में कुछ अपने ढूँढ रहे हैं । चुराना है तो चुराइये शौक से विचारों की ख़ूबसूरतीसुन्दर चेहरो में क्या रखा है बदरंग हो … Read more

कुम्हार और माटी

तोड़ दी माटी की चिलममाटी हो गयी नाराज़ माटी बोली ऐ कुम्हार तेरी क्या मति हुई बेकार ।बोला कुम्हार ए प्यारी माटी मति में तो हुई अब मेरे सुधार मैंने बदला अपना फ़ैसला अब होगा सुराही का निर्माण ।माटी की बाँछें खिली खिली हो गयी वह उस पर निहाल बोली मति तो हुई मेरी बेकार … Read more