अक्षय पात्र

हरे कृष्ण हरे मुरारी, जय हो महिमा भारी,भक्त पुकारे सच्चे मन से, दौड़ें श्री बिहारी॥दुर्योधन का मन बहक उठा, बोला मुनिवर जाओवन में रहते पांचों पांडव, उनका आतिथ्य पाओ।दुर्वासा संग शिष्य अनेक, पहुँचे पांडव कुटिया द्वार,कहें “भोजन दे हे कुन्तिनंदन!”, सब पड़ गए विचार॥अक्षय पात्र था द्रौपदी के, सूर्य देव उपहार,दिन का समय गया था … Read more

लव कुश

वाल्मीकि का पावन आश्रम, दो बालक वहाँ पर पलते थे लव कुश उनके नाम हैं सुन्दर, बहुत मोहक वे दिखते थे।अश्वमेध का घोड़ा पकड़ा, लाकर एक वृक्ष से बांध दिया दी खुली चुनौती बालकों ने, अवध सेना से संग्राम किया । शत्रुघ्न आये, लक्ष्मण आये, भरत जी आये हनुमंत संगकिया मूर्छित तीखे तीरों से, पड़े … Read more

रत्नाकर

हे रत्नाकर !!अदभुत है तेरा स्थिर धर्म । तेरे तट पर बैठा, नमन तुझे मैं करता हूँ ,देख रहा हूँ तेरा अद्भुत वृहत स्वरूप,तेरा सुंदर स्थिर धर्म !! असंख्य रत्न मणियाँ, हीरे जवाहरात, गहरे हृदय में छिपाये रखते हो, पर मृत शरीर को बाहर फेंकते अदभुत है तेरा स्थिर धर्म । सारी नदियाँ तुझसे मिलती … Read more

माँ कैकेयी

हे माते कैकेयी ! क्यों माँगा तूने दो वरदानकिसके लिए ??बेटे भरत के लिए लगता तो नही .राम को तो तू ज़्यादा चाहती थी प्राणों से भी अधिक ..मेरा राम मेरा राम दिन रात यही रटती थी मन नहीं मानता माँ क्यों नहीं खोला अपना मुँह चुप्पी साधे रही अपयश लिया, पति को खो दिया … Read more

ईश्वर एक विभेद क्यों

एक ही धरती, एक ही आकाश,एक ही सूर्य का प्रकाश,एक ही चंद्र, नभ में एक जैसे तारे,फिर ईश्वर क्यों अलग-अलग?एक ही वायु, एक ही प्रकृति,एक ही अग्नि, एक ही जल है,एक ही प्राण, एक ही प्राणदाता,फिर ईश्वर क्यों अलग-अलग?एक ही सृष्टि, एक रचयिता,एक ही पालनकर्ता, संहारक भी एक ही,सुख-दुख भी एक जैसे होते,खुशी और पीड़ा … Read more

लौट जा तू माँ गंगे

एक महीप धरा पर लायादूजा तट है बांध रहा पाप तारिणी मोक्षदायिनी हे माँ !! यही तेरा सत्कार रहा ।शहर शहर के गंदे नाले माँ तेरी आँचल में गिरते हैं कितना कृतघ्न हुआ यह मानव उपकार का यह प्रतिकार रहा ।नदी नहीं संस्कार है गंगा शिव जी का श्रृंगार है गंगा विष्णु का चरणोदक हैकितना … Read more

रामायण

रामायण केवल एक ग्रंथ नही मानव जीवन जीने का दर्शन है, एक से बढ़कर एक पात्र यहाँ स्नेह, त्याग और समर्पण है । तुलसीदास की अनुपम कृति शिव पार्वती का संवाद है ये, मुखरित साक्षात शिव जी से सत्यम शिवम् सुन्दरम् है । हर इक चौपाई है बीज मंत्र शब्द शब्द सागर से गहरे हैं, … Read more

रे मन प्रभु भक्ति में तू रम जा

रे मन ! प्रभु भक्ति में रम जा शरण प्रभु का तू गह ले ..2 आँख मूँद ले ध्यान लगा ले सोच जरा परीक्षित जैसे समय सीमा तेरी निश्चित है काल खड़ा है द्वार पर तेरे शेष जीवन जो तेरे हाथ में मानव जीवन सार्थक कर ले हाथ कहीं मलता न रह जा शरण प्रभु … Read more

भजन नवधा भक्ति

कथा श्रवण परीक्षित जैसी वाचक हो शुक देव सा भक्त बनो प्रह्लाद के जैसेप्रभु दास बनो हनुमान सा।पाद सेवन माँ लक्ष्मी जैसी प्रभु वंदन अक्रूर सा संख्य भाव में अर्जुन बन जाओ उपदेशक हो श्रीकृष्ण सा । अर्पण कर दो तन मन प्रभु को आत्म निवेदन राजा बलि सा नवधा भक्ति में रम जाओ प्रेम … Read more

ऐ मेरी रसना

ऐ मेरी रसना राम नाम तू क्यों नहीं रटतीनिन्दा करती दिन रात औरों की तेरा जी नहीं भरती विषयों में अनुरक्ति तेरी समय व्यर्थ तू करती भाग रही मृगतृष्णा के पीछे अमृत रस ग्रहण नहीं करती श्रवन कलंकित हो गये तेरे ईर्ष्या द्वेष की बातें सुनती नहीं करती भगवद् भजन तू सत्संग से दूर भागती … Read more