अक्षय पात्र
हरे कृष्ण हरे मुरारी, जय हो महिमा भारी,भक्त पुकारे सच्चे मन से, दौड़ें श्री बिहारी॥दुर्योधन का मन बहक उठा, बोला मुनिवर जाओवन में रहते पांचों पांडव, उनका आतिथ्य पाओ।दुर्वासा संग शिष्य अनेक, पहुँचे पांडव कुटिया द्वार,कहें “भोजन दे हे कुन्तिनंदन!”, सब पड़ गए विचार॥अक्षय पात्र था द्रौपदी के, सूर्य देव उपहार,दिन का समय गया था … Read more