हे हरि तेरी शरण मैं पाऊँ
हे हरि ! तेरी शरण मैं पाऊँ मन की बात कहूं मैं कैसे कैसे प्रभु बताऊँ चाह अलग है सोच अलग है कैसे परमात्म सुख पाऊँ । हाथ आपका हो मेरे सर पर पशु पक्षी कंकड़ पत्थर बन जाऊँ चेतन हो या रहूँ अचेतन मैं न कभी पछताऊँ । स्वार्थ मय यह दुनिया है कहीं … Read more