हे हरि तेरी शरण मैं पाऊँ

हे हरि ! तेरी शरण मैं पाऊँ मन की बात कहूं मैं कैसे कैसे प्रभु बताऊँ चाह अलग है सोच अलग है कैसे परमात्म सुख पाऊँ । हाथ आपका हो मेरे सर पर पशु पक्षी कंकड़ पत्थर बन जाऊँ चेतन हो या रहूँ अचेतन मैं न कभी पछताऊँ । स्वार्थ मय यह दुनिया है कहीं … Read more

रे मन जोड़ प्रभु से नाता

रे मन ! जोड़ केवल प्रभु से नाता छोड़ टेक मन में कर विचार प्रभु भजन ही कलियुग का आधार जल मंथन से जैसे मक्खन न मिलता प्रभु कृपा बिन भव सागर न तरता ..गंग तीर बसने से क्या होता पशु बेचारा खूंटे में बँधा रहता स्वामी जब तक बंधन न खोले वह तो प्यासा … Read more

हे हरि कहाँ जाऊँ तुम्हें छोड़ कर

हे प्रभु ! कहाँ जाऊँ मैं तुझे छोड़ कर कोई और ठिकाना नहीं जगत में भीतर भरा है खोट ही खोट अपनी करनी अपने हाथ से बिगाड़ीकहाँ जाऊँ मैं तुझे छोड़ कर । मैं तो तुझसे विमुख रहा नेत्र होते हुए भी दृष्टि हीन रहापर कौन हे तेरे सिवाय मेरे कहाँ जाऊँ मैं तुझे छोड़ … Read more

मुझे तेरे कर कमलों की चाह

हे प्रभु ! मुझे तेरे कर कमलों की चाह जिन कर कमलों से शिव धनु तोड़ादूर किया संदेह जनक का जिन कर कमलों से गुह निषाद को भेंटा मुझे उन्हीं कर कमलों की चाह ।जिन कर कमलों से जटायु को लीन्हा पितृ समान पिण्ड दान दिया जिन कर कमलों से भरत को अंक लगाया मुझे … Read more

भैरव रूप शिव स्तुति

विभत्स हूँ निर्लेप हूँसमाधी में मैं चूर हूँतांडवित- नृत्य पर सृष्टि का संहार हूँ । मैं रुद्र हूँ ! मैं रुद्र हूँ ! मैं रुद्र हूँ ! मैं रुद्र हूँ त्रिनेत्र हूँ काल का कपाल हूँ श्मशान में हूँ नाचता मृत्यु का मैं ग़ुरूर हूँ । मैं रुद्र हूँ ! मैं रुद्र हूँ ! मैं … Read more

तेरी भक्ति बिन मोह न जाये

हे हरि ! तेरी भक्ति बिन मोह न जाये ..प्रभु कृपा बिन न मोह दूर होन यह ग्रन्थिन माया जायेवाचक चाहे कितना ज्ञानी हो भव सागर पार कर न पाये । दीन दुखी जैसे भूख के मारे खूब तड़पे और चिल्लाये चित्र टंगे हो गृह कल्पवृक्ष के चित्र देखकर भूख न जाये । षँटरस भोजन … Read more

मन का भ्रम भजन

हे हरि !तेरे कृपा बिन मन का भ्रम न जाये बिन बांधे मैं स्वयं बंधा हूँ तोते की तरह परवश पड़ा हूँ परमात्म तत्व ज्ञान बिना पीड़ा से मुक्ति कैसे पाये । वेद गुरू संत और स्मृतियाँ एक स्वर से सब यही कहते हैं यह दृश्य मान जगत असत् है असत् को सत् समझ न … Read more

मैं अवगुण की खानी भजन

प्रभु ! क्यों लगाऊँ दोष तुम्हें, मैं ही अवगुण की खानी..प्रभु क्यों लगाऊँ दोष तुम्हें, मैं ही हूँ अवगुण की ख़ानी सार नही जब बाँस के भीतर, बेचारा चंदन सुगंध कैसे भरे ।करील लगाये दोष बसंत को, हरा भरा मुझे नहीं करता है हत भाग्य असल है वह करील,बिन पत्ते हरा भरा कैसे करे ।ईश्वर … Read more

राम का दास भजन

रे मन ! हो जा तू राम का दास हर क्षण हर पल कर अरदास जो करता प्रभु का भजन है वही सुशील और पुण्य वानवहीं साधक वही है ज्ञानी वहीं तीनों लोकों में है महान । रे मन ..सबके स्वामी, सब में रमते जाने सबके मन की बात जिनकी सेवा महादेव है करते जपते … Read more

मीराबाई

प्रेम का प्याला पी ले प्राणी, हरि रस अमृत धार।मीरा जैसी प्रीत जगा ले, साँवरिया हो आधार॥प्रेम का प्याला पीकर मीरा, अमृत रस का पान किया,डगर-डगर साँवरिया ढूँढे, साधु-संत संग डेरा डाल लिया।राजमहल का वैभव छोड़ा, वैरागी का भेष धरा,मंदिर-मंदिर तप करती मीरा, गिरधर को पति माना॥ग़मों का प्याला पीती रही, कृष्ण-प्रेम को गटक लिया,राणा … Read more