खींच मच निर्मोही
खींच मत निर्मोही , सुरभित पुष्पों से लदी ये डालटूट जायेगी शाख़ से, पुष्प होंगे उदास ..खिलखिलाती पुष्पित लताएँ,महक रहा घर आँगन नव कलियाँ, अर्ध विकसित, भ्रमरों का आच्छादन, बिखर जायेगें पुष्प धरा पर,,,जब पायेगें न साँसचुन ले हौले से पुष्प माली,, मत कर तू इन्हें उदास ।मधुर, मोहक, पुष्प सारे,,,उमंग में हैं मस्त झूमते … Read more