खींच मच निर्मोही

खींच मत निर्मोही , सुरभित पुष्पों से लदी ये डालटूट जायेगी शाख़ से, पुष्प होंगे उदास ..खिलखिलाती पुष्पित लताएँ,महक रहा घर आँगन नव कलियाँ, अर्ध विकसित, भ्रमरों का आच्छादन, बिखर जायेगें पुष्प धरा पर,,,जब पायेगें न साँसचुन ले हौले से पुष्प माली,, मत कर तू इन्हें उदास ।मधुर, मोहक, पुष्प सारे,,,उमंग में हैं मस्त झूमते … Read more

माँ शबरी

चुन चुन कर फूलों की डगर सजाऊँ, राह निहारूँ, हे राम ! तुम कब आओगे मेरी कुटिया में कह गये गुरु जी मेरे, करना तुम इंतजार शबरीआयेगें एक दिन श्री राम,,,,,तेरी इस कुटिया में, चुन चुन कर फूलों की डगर सजाऊँ, राह निहारूँ, हे राम ! तुम कब आओगे,,गरीब की कुटिया में । अपने गुरु … Read more

भजो रे मन भजन

भजो रे मन एक ही है आधार !जीवन डोर बँधी प्रभु तुमसे तुम ही हो करतार, भजो रे मन एक ही है आधार !साँस साँस पर अधिकार है तेरा तू ही हैं खेवनहार, भजो रे मन एक ही है आधार !मृगतृष्णा में भाग रहा मन सब हैं ये बेकार, भजो रे मन एक ही है … Read more

माँ शारदे वंदना

नमो भगवती माँ सरस्वती, ज्ञान का उपहार दे । आवाहन कर रहा आपका, आ विराजो माँ पटल पर ! २ सुन विनती हे भारती !! कर तू वीणा का झंकार कलुष भाव हृदय से मिटे ,, शुद्ध होये विचार, ब्रह्म विचार की परम तत्व, हृदय में अनूठे भाव देआवाहन कर रहा आपका, आ विराजो माँ … Read more

अपना जपूँगा महामंत्र

अपना जपूँगा महामंत्र अपना जपूँगा महामंत्र किसकी खोजूँ मैं शरणसबका जीवन वैचित्र्य भरा अपना स्वार्थ साधने में संसार है ये पड़ा ॥ अहम का बोलबाला है दिल आज काला हैविश्वास हम किस पर करें अपने ही छीनते निवाला है रिश्तों में भी अब नहीं पहले जैसी मिठास अपना स्वार्थ साधने में हीसंसार है ये पड़ा … Read more

हे राम ज़रा बताओ

हे राम ! जरा तुम ही बताओ,तेरी राम खड़ाऊँ कहाँ गईइस कलि काल में रिश्तों की अहमियत विलुप्त हुई ..कर रहे छल कपट आपस में, छीना झपटी में लगे हुए छल प्रपंच में सब पड़े हुए, प्रभु चरण पादुका कौन छुए । भरत ने राज सिंहासन हड़पा, तनिक लाज उन्हें न आई कैकेयी खड़ी अट्टहास … Read more

राम वाल्मीकि संवाद

बोले राम- हे श्रृषिवर ! सुरम्य स्थल कोई बताओकहाँ पर ठाँव बनाऊँ मैंकण कण में निवास आपका,सर्वत्र आपको पाऊँ मैं बोले वाल्मीकि – हे प्रभु ! कहाँ पर ठाँव दिखाऊँ मैं भला कौन सा है ऐसा स्थल,,,जहां आप नहीं रहते हैं आप तो त्रिकालदर्शी हैं, करतल पर जग को रखते हैं आप साक्षात जगदीश्वर हैं, … Read more

भीष्म प्रतिज्ञा या विवशता

मन में एक जिज्ञासा है, क्या भीष्म पितामहजीवन में कभी ख़ुश रहे होंगे,, खुलकर हंसे होंगे ? हंसे भी होगें ,, तो किसके साथ ? विदुर के साथ या चक्रधारी के साथ, ,,या जीवन पर्यन्त मूक रहे दुर्योधन महत्वाकांक्षी था, धृतराष्ट्र पुत्र मोह में बंधे थे, प्रिय पांडव साथ नहीं थे, मन की वेदना किससे … Read more

माँ शारदे वंदना

नमो भगवती माँ सरस्वती, ज्ञान का भंडार दे कृपा पात्र बनूँ आपका, भक्ति का उपहार दे ..मनसा वाचा कर्मणा ,ध्यान धरूँ माँ हृदय स्थल आत्म शुद्धि हो जाये मेरा, मन हो जाये निर्मल ब्रह्म विचार की परम तत्व, हृदय में अनूठे भाव दे कृपा पात्र बनूँ मैं आपका, भक्ति का उपहार दे ..शुक्ल वर्ण, शुक्लाम्बरा, … Read more

कान्हा की चित्रकारी

चित्रकारी कर रहे कृष्ण काश इन्हीं रंगों में घुल जाता अहो भाग्य यदि ऐसा हो जाता अपना जन्म धन्य मैं पाता रंग तूलिका जो प्रभु हाथ है कितनी भाग्य शालिनी है काश उसकी डंडी मैं बन जाता अपना जन्म धन्य मैं पाता.रंग पिरोयें है जिन रंगों से वे रंग न मिटने वाले हैं काश इन्हीं … Read more