केवट भक्ति
हे केवट ! तेरे भाग्य पर इतराता हूँ तेरी राम भक्ति पर शीश नवाता हूँ कितने पुण्य कर्म किये थे तूने साक्षात प्रभु राम तेरे घाट पे आते हैं ।जो भव सागर से नैया पार कराते हैं कहते हैं हे केवट ! तू मुझे गंगा पार करा दे !तू अपनी शर्तों पर उन्हें नचाता है … Read more