एक ही धरती, एक ही आकाश,
एक ही सूर्य का प्रकाश,
एक ही चंद्र, नभ में एक जैसे तारे,
फिर ईश्वर क्यों अलग-अलग?
एक ही वायु, एक ही प्रकृति,
एक ही अग्नि, एक ही जल है,
एक ही प्राण, एक ही प्राणदाता,
फिर ईश्वर क्यों अलग-अलग?
एक ही सृष्टि, एक रचयिता,
एक ही पालनकर्ता, संहारक भी एक ही,
सुख-दुख भी एक जैसे होते,
खुशी और पीड़ा एक जैसे देते,
एक ही रंग रक्त का होता,
दिल धड़कता एक जैसे ही,
भूख-प्यास एक जैसी ही,
जन्म-मृत्यु एक जैसी होती,
पाप-पुण्य एक जैसे होते,
सत्य-झूठ एक जैसे होते,
अंतिम सत्य एक ही होता,
फिर ईश्वर क्यों अलग-अलग?