राम नाम रस पी ले रे मन

राम नाम रस पी ले रे मन,तेरे सब दुख मिट जाये राम बिना शांति कहाँ पाये,राम बिना शांति कहाँ पाये माया के मेले में भटका मन,पथ का पता तू पा न सके सुख की चाह में दौड़ा फिर भी,दुख का काँटा मन को चुभे एक घड़ी को बैठ ज़रा मन,झाँक ज़रा तू भीतर अपने सुख … Read more

केवट भक्ति

हे केवट ! तेरे भाग्य पर इतराता हूँ तेरी राम भक्ति पर शीश नवाता हूँ ।कितने पुण्य कर्म किये थे तूने साक्षात प्रभु राम तेरे घाट पे आते हैं, जो भव सागर से नैया पार कराते हैं कहते हैं हे केवट ! तू मुझे गंगा पार करा दे !तू अपनी शर्तों पर उन्हें नचाता है … Read more

मनसा आरती भजन

रे मन ! क्यूँ न कर तू मनसा आरती भाग रहा है इधर उधर ।जड़ चेतन सब हरि रूप हैं सर्व व्यापी अरु नित्य स्वरूप, राग द्वेष हैं दुख के कारक रे मन ! इनको वश में तू कर, कर ईश से मनसा प्रार्थना मन की श्रद्धा से तू धूप*कर ।धूप के बाद, दीप* दिखा … Read more

शिव और शबरी का मिलन

बोले शिवजी माता शबरी से“हे माते! खिला दे मुझे वे बेर,जो प्रभु राम को तूने खिलाये थे।दे दे यह भिक्षा मुझे, भिक्षुक रूप में,तेरे द्वार पर आज मैं आया हूँ।”तेरे प्रेम ने शिव को झुका दिया,तेरे त्याग और समर्पण नेभक्ति का नया मार्ग दिखा दिया।ये भोलेनाथ भी आ पहुँचे तेरी कुटिया,हे माते! दे दे वे … Read more

हे माँ जगदम्बे

हे मां! हे माँ जगदंबे! हम शरण तुम्हारी आये हैं,मैया शरण तुम्हारी आयें हैं।कृपा अपनी बनाये रखना,हम केवल तेरे सहारे हैं।हे मां! हे माँ जगदंबे! नव रात्रि के इन नौ दिनों मेंधूम मची चहुंओर हैं।जहाँ भी जाओ हर गली में,माता तेरा शोर है।मन्दिर मन्दिर तेरे हो रहे जयकारे,हम शरण तुम्हारी आये हैं।जिसने भी की तेरी … Read more

लंका कांड हनुमान जी का मुक्का

तात स्वर्ग अपवर्ग सुख धरिय तुला एक अंग । तूल न ताहि सकल मिलि, जो सुख लव सत्संग॥हनुमान जी ने सत्संग का प्रभाव पूरी लंका पर डाला पर दो पात्रों पर उसका ज्यादा असर हुआ – 1. लंकिनी 2. विभीषण । 👉लंका में घुसते ही हनुमान जी की मुलाक़ात लंकिनी से हो जाती है मसक … Read more

औघड बाबा भजन

औंघड बाबा डम डम डमरू बजाये खड़े नंद के द्वार रे .माँ यशोदा धायी है भीतर से पलना में सोया, जग जायो मोरा लाल रे ॥२ बाबा बोले हे मैया हम बहुत दूर से आयो रे ,,, हाँ मोहि भिक्षा दे दो जो मोरे भायो रे मोरे कमी नहीं है धन की, न किसी वस्तु … Read more

भज ले बंदे राम का नाम

जीवन की कब हो जाए शामजप ले बंदे राम का नाम ॥ सुबह हुई कब शाम हुई समय भागता जाता है विषयों में फँसा हुआ इंसान इसी में उलझता जाता है भूल जाता है कहाँ से आया क्या है तेरा कामकुछ समय बंदे अपना निकालो ले लो राम का नाम ॥यह मेरा है यह तेरा … Read more

चंचल मन भजन

ये चंचल मन कुछ न समझे, मुझे उलझाए रहता हैएक जगह स्थिर नहीं होता, मुझे दौड़ाए रहता है । सुख में यह उछल रहा है, दुख में बैठकर रोता है यह संसार एक जल का बुलबुला समझ नही आता है अगले क्षण का पता नही वर्षों की योजना बनाता है क्षण भर में सपने ध्वस्त … Read more

हे कान्हा

हे कान्हा ! अब तुम आ जाओ अपना सुदर्शन चक्र चला जाओ ॥ धर्म हो रहा लुप्त प्राय भारत माँ तुम्हें पुकार रही, जो धरा आपने पोषित की थी अक्षुण्णता विखंडित हो रही ।जिस धरती पर तुमने जन्म लियावह अन्तर्वेदना से चीत्कार कर रही, लहूलुहान हो रही आज धरा हे कान्हा ! भारत माँ तुझे … Read more