दांत का तिनका दोहे

तिनका छोटा ही सही, घाव करे गंभीर ।

दाँतों में ऐसा फँसा,चुभता जैसे तीर ॥

देखन में छोटन लगे,छीने मुख की चैन ।

दंत छिद्र में आ फँसा, करता है बेचैन ॥

स्थायी घर बना लिया, दंत छिद्रों के बीच ।

नीम की सींके अब कहाँ, कैसे निकले नीच ॥

लघु किसी को न मानिए, सबका अपना क्षेत्र |

तिनके को ही देख लें, फँसे दांत ये नेत्र ॥

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.