तब सुन्दर कविता बनती है

तब एक सुन्दर कविता बनती है .

मधुर विचारों की श्रृंखला

मन में जब खिलखिलाती है

उमड़ते हैं भाव सुन्दर

सुघड़ सलोनी रूप में

लेखनी में उतर जाते हैं

तब एक सुन्दर कविता बनती है ।

एक कुम्हार की तरह

महीन मिट्टी चुनता है कवि,

कूटता है, पीसता है, छानता है,

मिट्टी में चमक आ जाती है

तब मूर्ति रूप में मिट्टी ढलती है

तब एक सुन्दर कविता बनती है

विचार प्रकट होते हैं,

अदृश्य होते है

उन्हें समय पर पकड़ना पड़ता है

मोती की तरह पिरोना होती है

फूँके जाते हैं शब्द शब्द में प्राण

तब जाकर एक सुन्दर कविता बनती है

भावनाओं की ये सरिता है

अपने आप बहती है

अर्थ पूर्ण विचारों से कविता जीवंत होती है

तब एक सुन्दर कविता बनती है ।

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