अन्नदाता किसान की पुकार

जोत रहा था वह खेतों को,धरती से सोना पाने को।गर्मी में तपता वह,परिवार की भूख मिटाने को।आधे तन पर कपड़ा, फटा पुराना,केवल इज्जत बचाने को।दो जून की रोटी पाने का ठिकाना नहीं,जो विधना उपलब्ध, उसी में भूख मिटाने को।कर्ज के बोझ तले पिसता,सूद पर सूद चढ़ता जाता।उगाही दूत जब घर में आता,चुपके से खिसक जाता।गरीब … Read more

दहेज की भेंट

*दहेज़ की भेंट ✍️पहला दृश्य . नदिया तट पर पड़ी हुई वह सोचा कवि माजरा क्या है, बोला कवि हे परम सुंदरी !आपका परिचय क्या है ?कौन हो तुम हे सुकुमारी !इस दुर्दशा को प्राप्त हुई हो, नदिया की इस जलधारा में दूर देश से बहकर आयी हो । किस घर की तुम बेटी हो … Read more

जय जयतु हे श्रमिक

जय जयतु !! हे श्रमिक !! आपके श्रम से ही हमारा भाग्य है ॥ घास फूस की झोपड़ी रिश्ता है संगमरमर से तराशते हैं पत्थरों को आप अपनी उँगलियों सेगढ़ते जा रहे सुन्दर भवन रेत की नव लेखनी से गगनचुंबी इमारतें खड़ी आपके ही कौशल से ॥जय जयतु !! हे श्रमिक ! आपके श्रम से … Read more

गरीबी एक अभिशाप

उपहास गरीबों की मत करना वो भी होता एक इंसान हैपरिश्रम की रोटी खाता है उसका भी होता स्वाभिमान है ॥ गरीब गरीबी में जीता है अपने जीवन से संघर्ष करता है हाय गरीब की जो लेता है उसको फल ईश्वर देता है मिथ्या गुमान में कभी न रहना धन दौलत पर गर्व न करना … Read more

हे नारी तू है नारायणी

हे नारी !!! तू ही है नारायणी✍️हे नारी !!! तू ही है नारायणी, तेरी शक्ति है अनंत अपार, तू ही है जीवन की धारातेरी धारा में बहकर इस जीवन की है नैया पार ।हे नारी !!! तू ही है नारायणी ! तू ही काली, तू ही दुर्गा तू नारायणी, तू जगदंबा है, तेरे हैं अनंत … Read more

दोहरा चरित्र

दोहरा चरित्र, दोहरा जीवन, होता एक दिखावाबाहर से दिखता साधारण, भीतर से है छलावा ॥अंदर से होता खोखला ऊपर से चमकता है दोहरा चरित्र मुखौटा पहनकर चलता हैसावधान रहें दोहरे चरित्र से मिलता केवल धोखा बाहर से दिखता साधारण, भीतर से है छलावा ॥छद्म भेष धारण करता है देता केवल धोखा असली चेहरे को छुपा … Read more

अभी समय है जाग जा हे मानव

अभी समय है जाग जा, हे मानव!प्रभु की भक्ति कर ले।सोचो ज़रा सोचो!हक़ीक़त को समझो!अर्थी पर पड़े हुए हो,शव पर कफ़न बाँधा जा रहा है!ढीली गरदन कहीं लटक न जाये उसे सँभाला जा रहा है।पैर कहीं अकड़ न जाये रस्सियों से बाँधा जा रहा है।कोई खींच रहा है इधर से,कोई खींच रहा है उधर से।मार … Read more

भिक्षुक

“ भिक्षुक”नाम तो अटपटा सा है देखने में ऐसा ही लगता है पर मेरे विचार से जिसने इस गूढ़ शब्द का अर्थ भलीभाँति समझ लिया उसने परमात्म को जान लिया ..इस मिथ्या संसार में हम सभी भिक्षुक ही तो हैं बिना भिक्षुक बने कोई ज्ञानी नही होता ज्ञानी हुए बिना कोई संन्यासी नहीं होता ..यह … Read more

पाश्चात्य जीवन

यहाँ देखता हूँ तो पाता हूँ लोग एकाकी जीवन ज़्यादा जी रहे हैं शौक से कम हैं लगता है मजबूरियाँ ज़्यादा हैं संयुक्त परिवार का चलन नही वृद्ध स्वयं अपना भार उठाते हैं बच्चे बालिग़ होते हैं घर से बाहर कर दिये जाते हैं हाँ समय काटते हैं कुत्तों के साथ, बिल्लियों के साथ ..दोस्तों … Read more

दहेज एक अभिशाप

बेटी ! क्या दूँ तुझे भेंटलोभियों का नहीं भरता कभी पेट तू तो उसी माँ की बेटी है जो दहेज की बलि चढ़ी थी याद हैं मुझे सब बातें ज्यों की त्यों,,,,पति ने गला घोटकर जला दिया कह दिया रसोई में जल गयी पर तू तो ज़िंदा रह गयीतू ही बता बेटी – क्या दूँ … Read more