आज के दुशासन

अजीब हालात जमाने की लोग दिल से खेल जाते हैंतबाह करके ज़िन्दगी मासूमों की शर्म नहीं खाते हैं ।खेल यह चौसड से कम नहीं फेंकते पाँसे शकुनि जैसे फँसा लेते चंगुल में जीवन भर के लिये घाव दे जाते हैं ।दक्ष हैं ये अपनी चालों में बहुत शातिर दिमाग़ रखते हैंबुनते जाल मकड़ियों जैसे मकड़जाल … Read more

हम बदल रहे हैं

हाँ हम बदल रहे हैं चोटियां छोड़ी, पगड़ी छोड़ी तिलक छोड़ा और चंदन छोड़ाकुर्ता छोड़ा , धोती छोड़ीयज्ञोपवीत छोड़ा, संध्या वंदन छोड़ाहाँ हम बदल रहे हैं.रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा महिलाओं ने साड़ी छोड़ी, बिछिया छोड़ी, चूड़ी छोड़ी चुनरी छोड़ी, मांग बिन्दी छोड़ीहाँ हम बदल रहे हैं..बच्चे छोड़े, आया पकड़ी संस्कृत छोड़ी और हिन्दी छोड़ी,श्लोक … Read more

क्या क़ुसूर था मेरा

क्या क़ुसूर था मेरा, सजन मेरे क्यों छोड़ चलेक्या क़ुसूर था मेरा, सजन मेरे क्यों छोड़ चलेब्याह कर लाये मुझको, डोली पहुँची पिया के घर,शोक संदेशा घर में आया, नहीं रहे मेरे प्रिय वर।निशब्द रही, किंकर्तव्यविमूढ़, सपने चकनाचूर हुए,हाय विधाता क्या क़ुसूर था, आप मेरे विपरीत हुए।बीच मँझधार में नाव फँसी, पतवार छोड़ निकल चले,अंत … Read more

जय जय हिन्दी

हिन्दी हमारी मातृभाषा, हिन्दी से हम परिभाषित ।बहुतायत बोली जाती, राज्य हो या केन्द्र शासित ॥विदेश में भी हम जाते हैं, हिन्दी से पहचाने जाते हैं ।दौड़ कर लोग पास आते हैं, मिलकर गले लगाते हैं ॥ गर्व है अपनी हिन्दी पर, जय हिन्दी जय हिन्दुस्तान ।हिन्दी हमारी जननी है, हमारी संस्कृति की पहचान ॥ … Read more

गरीब की ज़िन्दगी

शीत उष्ण बरसात हो, झेल रहे दिन रात । खुले गगन के ही तले, कटे ठिठुरती रात ॥ छत विहीन ये ज़िन्दगी, होती बहुत दुरूह । सर्द ठिठुरती रात में , उड़ जाती है रूह ॥ जाये तो जाये कहाँ, है न कोई उपाय ।रोज़ी रोटी के लिये, जगह जगह भरमाय ॥ दर दर ठोकर … Read more

गरीब की दीवाली

कच्ची माटी के दिये, बेंच रहा कुम्हार । मोलभाव की रार से, बेचारा लाचार ॥ भाव लगाते मूर्ति का, जिसको पूजे आप ।ईष्ट का सौदा करें, पुण्य मिला या पाप ॥होटल बिल भुगतान में, कभी न देखते बिल । करता माँग गरीब है, टूट जाता है दिल ॥ ग़रीब की तो ज़िन्दगी, होती एक अभिशाप … Read more

नया दौर

कहाँ गये पुराने गीत सुहाने, सोलहवें सावन के वे गानेगुजरी फ़िल्मी ये बातें हैं, चलो चलें अब नये जमाने नयी उपज की नयी सोच है, आधुनिक शिक्षा का प्रतिफल है जीवन जीना स्वच्छंद रूप से, दख़लंदाज़ी नहीं पसंद है ।तीस से पहले शादी नहीं होती, ना नुकुर उस पर भी होती माँ बाप की मर्ज़ी … Read more

आज का मेल मिलाप

कहाँ गया वो मिलना जुलना कहाँ गयी सब जान पहचान सुख दुख में भी खड़े न होते कितना बदल गया रे इंसान । कहाँ गया पैतृक घर अपनाकहाँ गये मेरे बूढ़े दादा दादी संयुक्त परिवार बिखर गये घर दिखता है जैसे श्मशान । बाबा को सारा गाँव जानता पिता को सब मोहल्ले वाले पुत्र को … Read more

कन्या भ्रूण की वेदना

मैं अधखिली कली हूँ तेरी बगिया की मुझको पापा नही कुचलो तुम घर आंगन बगिया महकाऊँगी असमय गर्दन न मोड़ो तुम !!अभी तो मैं एक कन्या भ्रूण ठहरी प्राणों का भी ठीक से नही संचार हुआसमझ ली पर आपके हृदय की मंशा आप दोनों को मेरी नहीं ज़रूरत है .भला दोष इसमें है क्या मेरा … Read more

हिन्दी का ह्रास

ह्रास हो रहा हिन्दी भाषा का अंग्रेज़ी को शान समझते हैं पेट से एबीसीडी सिखलाते माडर्न स्वयं को समझते है ।बच्चा बोलता मम्मी डैडी माता पिता अब पीछे हैं दादा जी ग्रांड पा बन गये दादी को ग्रांड मा कहते हैं ।नहीं जानते वे काका काकी रिश्तों की मिट गयी पहचान जो सिखलाते केवल अंग्रेज़ीबच्चों … Read more