गरीबी एक अभिशाप

उपहास गरीबों की मत करना वो भी होता एक इंसान है

परिश्रम की रोटी खाता है उसका भी होता स्वाभिमान है ॥

गरीब गरीबी में जीता है

अपने जीवन से संघर्ष करता है

हाय गरीब की जो लेता है

उसको फल ईश्वर देता है

मिथ्या गुमान में कभी न रहना

धन दौलत पर गर्व न करना

समय बदलते देर न लगती

समय होता बलवान है ॥

अपनी गरीबी में वो हँसता है

अपनी गरीबी में वो मरता है

गरीबी ही उसका सखा है

गरीबी ही है उसका शत्रु

बचपन से उसने सीखा है

संघर्षों में जीवन जीना

श्रम शक्ति ही उसकी पूंजी

पुरुषार्थ ही उसका निशान है ॥

कौड़ी कौड़ी संग्रह करता है

भविष्य बच्चों की बुनता है

छप्पन भोग के सपने नहीं

सूखी रोटी खाकर संतुष्ट होता है

छल कपट वह नहीं करता

उसका हृदय विशाल है

गरीब की गरीबी पर न हँसना

दिल में उसके बसते भगवान हैं ॥

अपनी गरीबी से वो शापित है

गरीबी होती एक अभिशाप है

धूप में वह तपता रहता है

उसके दिल में भी अरमान है

मत हँसो मत खिल्ली उड़ाओ

उसका भी सम्मान करो

राजा से रंक,रंक से राजा हो जाता

प्रभु का अजीब विधान है ॥

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