औंघड बाबा डम डम डमरू बजाये
खड़े नंद के द्वार रे .
माँ यशोदा धायी है भीतर से
पलना में सोया, जग जायो मोरा लाल रे ॥२
बाबा बोले हे मैया हम बहुत दूर से आयो रे ,,, हाँ
मोहि भिक्षा दे दो जो मोरे भायो रे
मोरे कमी नहीं है धन की, न किसी वस्तु की चाह रे
मोरी इच्छा लल्ला दर्शन की, दर्शन मोई कराओ रे ।
औघड बाबा ..
न चाहूँ मैं हीरा मोती दर्शन लालसा से आया हूँ ,,, हाँ
तेरे लाल का दर्शन करने मैं कैलाश से आया हूँ
हाँ बड़ी दूर से आया हूँ मैं पैदल चलकर आया हूँ
आया हूँ छोड़ कर काशी, सुनकर बड़ा नाम रे ।
दर्शन नहीं कराऊँ बाबा मोरा श्याम सलोना रेहाँ ..
भेष बदल कर तुम आयो बाबा करिहो जादू टोना रे
चेहरा भयावह बनायो है अंग पर भभूत लगायो है
तोहरे गले में काले काले लटकत विकराल नाग रे ।
दर्शन मोहि कराइ दे मैया हर काम तेरा बन जायेगा ..हाँ
तेरे लाल का दर्शन करके जीवन मोरा संवर जायेगा
दर्शन की आस मिटाई दे मइयाँ ई नैनन की प्यास बुझाई दे
आया है ये औघड बाबा तेरे द्वारे लेकर बड़ी आस रे ।
तू तो बाबा दर्शन करके अपनी गली निकल जइयौ
मोरा लाल तो बिना बात कै तुझे देखकर डर जइयौ
डर जइयों तोहरे गले में लटका देखकर
ये भुजंग काला नाग रे !
बाबा धूनी यहीं रमायेगा मैया पूरा कर दे आस रे .. हाँ
बिन दर्शन के मैं न जाऊँ काशी और कैलाश रे ..
बाबा ने धरना दीन्हों है, मोहन ने रोना कीन्हो है
चुप न होये आज श्याम रे ।
गोद में ले आयी मैया,दर्शन पायो लीला धारी का
ले बाबा खूब दर्शन कर ले, माधव मदन मुरारी का
बाबा ने दर्शन पायो, हाथ जोड़कर शीश नवायो
हंस दिये खिलखिला कर श्याम रे ।